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झारखंड सरकार का बड़ा कदम: राजस्व बढ़ाने के लिए बनेगा IRIS सिस्टम, कई विभागों के पोर्टल जुड़ेंगे

झारखंड में AI से पकड़ी जाएगी टैक्स चोरी, 6 महीने में तैयार होगा IRIS सिस्टम

झारखंड में 6 महीने में तैयार होगा IRIS सिस्टम, AI से पकड़ी जाएगी टैक्स चोरी; सरकार को राजस्व बढ़ने की उम्मीद

 

रांची: झारखंड में टैक्स चोरी पर लगाम लगाने और सरकारी राजस्व संग्रहण को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार नई तकनीक का सहारा लेने जा रही है। वाणिज्य-कर विभाग ने CT-MIS परियोजना के तहत Choice Consultancy Services Private Limited के साथ एकरारनामा किया है। इसके तहत राज्य में Integrated Revenue Intelligence System (IRIS) विकसित किया जाएगा। इस प्रणाली को अगले छह महीने में तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।

 

गुरुवार को प्रोजेक्ट भवन, रांची में वित्त एवं वाणिज्य-कर मंत्री राधाकृष्ण किशोर की उपस्थिति में यह एकरारनामा संपन्न हुआ। सरकार का उद्देश्य विभिन्न विभागों के राजस्व संबंधी ऑनलाइन पोर्टल को एकीकृत कर कर चोरी और राजस्व के नुकसान की पहचान करना है।

 

AI और बिजनेस इंटेलिजेंस से होगी टैक्स चोरी की निगरानी

 

वाणिज्य-कर आयुक्त-सह-सचिव अमित कुमार ने बताया कि IRIS प्रणाली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और बिजनेस इंटेलिजेंस (BI) आधारित टूल्स का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके जरिए विभिन्न विभागों से मिलने वाले डेटा का विश्लेषण कर संभावित कर अपवंचन और राजस्व ह्रास की पहचान की जा सकेगी।

 

इस सिस्टम के माध्यम से संबंधित विभागों को जरूरी सूचनाएं उपलब्ध होंगी, जिसके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकेगी। इससे विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने और राजस्व संग्रहण की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

 

इन विभागों के पोर्टल होंगे एकीकृत

 

IRIS प्रणाली के तहत राज्य के विभिन्न विभागों के ऑनलाइन पोर्टल का API Integration किया जाएगा। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

 

– खान एवं भूतत्व विभाग का JIMMS पोर्टल और GSTN API

– परिवहन विभाग का VAHAN पोर्टल

– कार्य विभाग एवं आईटी विभाग का WAMIS पोर्टल

– राजस्व विभाग का भूमि पंजीकरण पोर्टल

– नगर विकास विभाग का Property Tax पोर्टल

– श्रम विभाग का Labour Cess पोर्टल

– उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग का राजस्व पोर्टल

– JPT पोर्टल और ट्रेड लाइसेंस पोर्टल

– JED पोर्टल और बिजली बिल पोर्टल

 

इन पोर्टलों के एकीकरण से अलग-अलग विभागों के राजस्व संबंधी आंकड़ों का संयुक्त विश्लेषण किया जा सकेगा।

 

झारखंड को 22 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का दावा

 

वित्त एवं वाणिज्य-कर मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि केंद्र की आर्थिक नीतियों, MMDR एक्ट, जीएसटी सुधारों और मनरेगा के अंतर्गत अनुदान में कमी के कारण झारखंड को लगभग 22 हजार करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति हो रही है।

 

मंत्री के अनुसार, MMDR एक्ट के कारण राज्य को करीब 14 हजार करोड़ रुपये, जबकि जीएसटी सुधारों और मनरेगा के अंतर्गत अनुदान में कमी के कारण लगभग चार-चार हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।

 

उन्होंने कहा कि खनिज संपदा के दोहन से पर्यावरण, वन क्षेत्र, जनस्वास्थ्य और सड़कों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इन परिस्थितियों में राज्य को अपने संसाधनों से राजस्व संग्रहण बढ़ाने की दिशा में काम करना होगा।

 

तीन साल तक होगा परियोजना का क्रियान्वयन

 

सरकार के मुताबिक, IRIS प्रणाली का विकास छह महीने में किया जाएगा। इसके बाद आगामी तीन वर्षों तक इसके क्रियान्वयन का कार्य होगा। परियोजना के माध्यम से राजस्व प्रशासन को तकनीक आधारित बनाने और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की योजना है।

 

कार्यक्रम में Choice Consultancy Services Private Limited के प्रतिनिधि सुभाष पाठक ने प्रस्तावित प्रणाली की तकनीकी संरचना और कार्यप्रणाली पर प्रस्तुति दी। इस अवसर पर विभाग की संयुक्त सचिव पूनम कुजूर, राज्य-कर अपर आयुक्त दिलीप कुमार मंडल, जीवनारायण मंडल सहित अन्य अधिकारी एवं कंसल्टेंसी के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

 

राज्य सरकार को उम्मीद है कि IRIS प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन से कर चोरी की पहचान करने, राजस्व के नुकसान को कम करने और झारखंड की वित्तीय आत्मनिर्भरता मजबूत करने में मदद मिलेगी।

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