
झारखंड सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) को प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के लिए सतत व्यावसायिक विकास (Continuous Professional Development-CPD) कार्यक्रम के नए चरण की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस कार्यक्रम का शुभारंभ किया। नए शैक्षणिक सत्र से कक्षा 6 से 12 तक के शिक्षकों को इस प्रशिक्षण से जोड़ा जाएगा।
1.20 लाख शिक्षकों को मिलेगा प्रशिक्षण
शिक्षा विभाग का लक्ष्य राज्य के करीब 1.20 लाख सरकारी शिक्षकों को चरणबद्ध तरीके से आधुनिक प्रशिक्षण देना है। पिछले शैक्षणिक सत्र में यह कार्यक्रम प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए संचालित किया गया था, जिसे अब माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों तक विस्तारित किया गया है।
TNA के आधार पर होगा प्रशिक्षण
शिक्षा विभाग के अनुसार वर्ष 2025 में टीचर नीड असेसमेंट (TNA) के माध्यम से लगभग 72 हजार प्राथमिक शिक्षकों का मूल्यांकन किया गया था। उनकी दक्षता और प्रशिक्षण की जरूरत के आधार पर शिक्षकों को चार अलग-अलग समूहों में विभाजित किया गया, ताकि उन्हें आवश्यकता के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जा सके।
हर वर्ष 50 घंटे का प्रशिक्षण अनिवार्य
नई शिक्षा नीति के अनुरूप प्रत्येक शिक्षक के लिए हर वर्ष 50 घंटे का CPD प्रशिक्षण अनिवार्य होगा।
इसमें शामिल होंगे:
- 20 घंटे ऑफलाइन प्रशिक्षण
- 30 घंटे ऑनलाइन प्रशिक्षण
ऑनलाइन प्रशिक्षण राज्य सरकार के G-Guruji ऐप के माध्यम से कराया जाएगा।
डिजिटल और गतिविधि आधारित शिक्षण पर जोर
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों को निम्न विषयों पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा:
- डिजिटल तकनीक का प्रभावी उपयोग
- गतिविधि आधारित शिक्षण (Activity-Based Learning)
- समावेशी शिक्षा (Inclusive Education)
- आधुनिक मूल्यांकन प्रणाली
- विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता विकसित करने के नवीन तरीके
शिक्षा विभाग का कहना है कि इसका उद्देश्य केवल शिक्षकों के ज्ञान को बढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें आधुनिक शिक्षा प्रणाली के अनुरूप तैयार करना है।
पिछले प्रशिक्षण के मिले सकारात्मक परिणाम
विभाग के मुताबिक, पिछले सत्र में आयोजित CPD प्रशिक्षण के बाद शिक्षकों की डिजिटल दक्षता, पाठ योजना (Lesson Plan) तैयार करने की क्षमता और विद्यार्थियों की सीखने की जरूरतों को समझने में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला। इसी अनुभव के आधार पर अब कार्यक्रम का दायरा बढ़ाया गया है ताकि राज्य की स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में व्यापक सुधार किया जा सके।



