रांची: World Economic Forum की बैठक में झारखंड की भागीदारी को लेकर राज्य सरकार ने अपना विजन स्पष्ट कर दिया है। 14 जनवरी 2026 को जारी बयान में मुख्यमंत्री सचिवालय ने कहा है कि दावोस में झारखंड की उपस्थिति महज एक औपचारिक वैश्विक संवाद नहीं, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक ‘टर्निंग प्वाइंट’ साबित होगा। 25 साल का युवा झारखंड अब दुनिया के सामने अपनी नई पहचान बनाने को तैयार है।
खनिजों का पावरहाउस और भारत की शक्ति
सरकार ने जोर देकर कहा कि झारखंड भारत के औद्योगिक विकास की रीढ़ है। राज्य में कोयला, लौह अयस्क, तांबा, यूरेनियम और क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिज) का विशाल भंडार है। जब भारत खुद को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी हब के रूप में पेश कर रहा है, तब झारखंड अपने खनिज संसाधनों, मानव पूंजी और औद्योगिक आधार के साथ राष्ट्रीय विकास में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
कच्चे माल के स्रोत से आगे की सोच
सीएम हेमंत सोरेन का लक्ष्य दुनिया को यह बताना है कि झारखंड अब केवल ‘कच्चे माल’ (Raw Material) का स्रोत नहीं रहा। राज्य अब वैल्यू-एडेड इंडस्ट्रीज, रिन्यूएबल एनर्जी और रिस्पॉन्सिबल माइनिंग (जिम्मेदार खनन) में ग्लोबल पार्टनर बनने की क्षमता रखता है। दावोस वह मंच बनेगा जहां झारखंड के लिए नीति, पूंजी और नवाचार (Innovation) एक साथ आएंगे और रणनीतिक साझेदारियां तय होंगी।
‘प्रकृति के साथ विकास’ का मॉडल
विश्व आर्थिक मंच का एजेंडा झारखंड की “प्रकृति के साथ सामंजस्य में विकास” की सोच से पूरी तरह मेल खाता है। आदिवासी बहुलता और समृद्ध जंगलों वाला यह राज्य दुनिया को संदेश देगा कि संसाधन संपन्न होने के बावजूद, पर्यावरण और समुदायों की रक्षा करते हुए कैसे सतत विकास (Sustainable Development) किया जा सकता है। सीएम सोरेन वहां मौजूद राष्ट्राध्यक्षों और शीर्ष सीईओ के सामने ‘ग्रीन और इंक्लूसिव ग्रोथ’ का मॉडल पेश करेंगे।
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