झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने भाजपा पर एक बार फिर बड़ा हमला बोला है। पार्टी के महासचिव विनोद पांडेय ने आरोप लगाया है कि SIR (Special Intensive Revision) की आड़ में गरीब, आदिवासी और पिछड़े वर्गों के अधिकारों को व्यवस्थित तरीके से कमजोर किया जा रहा है।
“SIR नहीं, अधिकार छीनने की रणनीति”
विनोद पांडेय ने कहा कि बिहार में SIR के नाम पर 35 लाख से अधिक गरीब परिवारों के राशन कार्ड रद्द किया जाना कोई सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है।
उनका आरोप है कि यह सिर्फ शुरुआत है—आज राशन कार्ड, कल पेंशन और आने वाले समय में अन्य सरकारी योजनाओं को भी प्रभावित किया जा सकता है।
गरीबों पर सीधा असर
झामुमो नेता ने कहा कि किसी परिवार का राशन कार्ड रद्द होना केवल एक दस्तावेज का खत्म होना नहीं है, बल्कि इससे उस परिवार की रोजमर्रा की जिंदगी पर सीधा असर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि इससे गरीबों की रसोई ठंडी पड़ जाती है, बुजुर्गों की पेंशन रुक जाती है और बच्चों के भविष्य पर भी असर पड़ता है।
भाजपा पर गंभीर आरोप
भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी की नीति ऐसी परिस्थितियां पैदा करने की है, जिससे गरीब, आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्ग धीरे-धीरे कमजोर हो जाएं और उन्हें मिलने वाली सरकारी सुविधाएं स्वतः समाप्त हो जाएं।
पुराने फैसलों का भी जिक्र
विनोद पांडेय ने झारखंड में रघुबर दास के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भी 10 लाख से अधिक राशन कार्ड रद्द किए गए थे। उनके अनुसार, यह दर्शाता है कि भाजपा अलग-अलग राज्यों में एक जैसी नीति को लागू करने की कोशिश कर रही है।
“यह अस्तित्व की लड़ाई है”
झामुमो महासचिव ने इसे सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोगों के अस्तित्व से जुड़ा मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि यह सब बिना पर्याप्त पारदर्शिता और जवाबदेही के किया जा रहा है।
उन्होंने जनता से अपील की कि वे सतर्क रहें और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएं। उनके मुताबिक, यह लड़ाई सिर्फ SIR के खिलाफ नहीं, बल्कि सम्मान, अधिकार और अस्तित्व की रक्षा की लड़ाई है।
