20 साल का सफर खत्म: क्यों याद आ रहे हैं नीतीश कुमार?

नीतीश के बिना बिहार: क्या जारी रहेगा विकास का पहिया?

कल जब नीतीश कुमार ने बिहार की सत्ता छोड़ी, तो लोगों के मन में कई सवाल उठने लगे। क्या नीतीश कुमार की तरह सत्ता आगे चल पाएगी? लोग नीतीश कुमार को आखिर क्यों याद कर रहे हैं? नीतीश कुमार बिहार के अब तक के सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री रहे हैं। इसके पीछे उनके वे बड़े फैसले हैं जो उन्होंने बदलते समय के साथ लिए। उन्होंने बिहार के आम नागरिकों को केंद्र में रखकर ऐसे फैसले लिए जिनसे बिहार की देश में छवि ही नहीं इसका भविष्य भी बदल गया। आप सोचिए कि वो 14 अप्रैल को वो बिहार की सत्ता को छोड़ने वाले थे लेकिन इसके ठीक 1 दिन पहले भी वो हमेशा की तरह सरकार के कामकाज को देखने के हाजीपुर निकल गए , नीतीश कुमार को लोग याद भी इन्हीं वजहों से याद कर रहे हैं चलिए कड़ी दर कड़ी आपको बताते है नीतीश कुमार ने अपने कार्यकाल में बिहार को क्या कुछ दिया

1. जनता से सीधा जुड़ाव और जमीनी यात्राएं 
2005 में मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने गांव-गांव की यात्रा शुरू की। उन दिनों वे गाड़ियों के काफिले और पूरी टीम के साथ चलते थे। साथ में टेंट होता था और रात जहाँ होती थी, वहीं पूरी टीम रुक जाती थी। सुबह उठकर वे गांवों में घूम-घूम कर लोगों से बातें करते थे, उनके घरों में चाय पीते थे और उनकी समस्याओं से अवगत होते थे। अधिकारियों का काफिला साथ चलता था और वे तुरंत काम का आदेश देते थे। दिन में ‘जनता दरबार’ लगता था, जिससे प्रशासन की पहुंच सीधे गरीब तक हुई।

2. ‘जंगलराज’ की छवि से मुक्ति और ‘स्पीड ट्रायल’

2005 से पहले बिहार को लोग ‘क्राइम स्टेट’ के नाम से जानते थे। बाहुबलियों का एकछत्र राज था और मर्डर, अपहरण व जातीय हिंसा आम थी। शाम होते ही लोग घरों के दरवाजे बंद कर लेते थे। अपराधियों का खौफ इतना था कि लोग बसों में यात्रा करने से डरते थे। नीतीश कुमार ने आते ही ‘स्पीड ट्रायल’ शुरू किया, स्पेशल कोर्ट्स बने और पुलिस को ‘फ्री हैंड’ दिया गया। अपराधियों को सजा हुई, वे जेल गए और बिहार के लोगों ने राहत की सांस ली। यही वह दौर था जब उनकी ‘सुशासन बाबू’ की छवि बनी।

3. महिला सशक्तिकरण और 50% आरक्षण

साल 2006 में नीतीश कुमार ने पंचायत चुनावों में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण लागू किया। बिहार देश का पहला राज्य था जहाँ इतना बड़ा आरक्षण दिया गया, जिसे बाद में अन्य राज्यों ने भी ‘इम्प्लीमेंट’ (Implement) किया। यह वह दौर था जब महिलाएं घरों से बाहर नहीं निकलती थीं, ऐसे में यह उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं था।

4. मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना

साल 2006 में ही उन्होंने ‘मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना’ शुरू की। उस समय लड़कियां बहुत कम स्कूल जाती थीं, लेकिन इस योजना से उन्हें फ्री में साइकिल मिलने लगी जिससे स्कूल के प्रति आकर्षण बढ़ा। उस वक्त गांव की सड़कें खराब थीं, लोग तंज कसते थे कि “सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढे में सड़क”, लेकिन नीतीश कुमार ने सड़कों का जाल बिछाकर गांव-टोले और मोहल्ले को मुख्य सड़क से जोड़ा। आज बिहार के हर घर में नल का पानी और गांव-गांव में बिजली है। जहाँ पहले बमुश्किल 5-6 घंटे बिजली रहती थी, आज 23 घंटे से कम बिजली नहीं रहती।

5. शराबबंदी और सात निश्चय योजना

महिला सशक्तिकरण की कड़ी में 2016 में जब नीतीश कुमार पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आए, तो उन्होंने पूर्ण शराबबंदी का कानून बनाया। आज शराबबंदी के 10 साल हो चुके हैं। इससे बिहार में घरेलू हिंसा में कमी आई और महिलाएं व बच्चे सबसे ज्यादा लाभान्वित हुए।

6. रोजगार और लाखों शिक्षकों की बहाली

नीतीश कुमार के कार्यकाल में शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़े बदलाव हुए। 2005 में उन्होंने बड़े स्तर पर शिक्षकों की बहाली निकाली और पंचायतों को अधिकार दिया कि वे गुणवत्तापूर्ण शिक्षकों की नियुक्ति करें। इसके बाद 2011 और 2015 में भी बड़ी बहालियां हुईं। साल 2023-24 में बिहार में शिक्षक बहाली का ऐतिहासिक चरण शुरू हुआ, जिसमें अब तक तीन चरणों में लाखों अभ्यर्थियों ने शिक्षक बनकर बिहार के भविष्य को संवारने का जिम्मा उठाया है।

वे 20 साल बाद बिहार की सत्ता की बागडोर छोड़ दिया हैं। बिहार ने नीतीश के सत्ता में आने के बाद से विकास और बदलाव के कई चरण देखे हैं। नीतीश कुमार अब शायद ही फिर कभी मुख्यमंत्री बनें, लेकिन उनके फैसले बिहार का भविष्य गढ़ने वाले रहे हैं। इन फैसलों के प्रभाव नीतीश के दौर की याद दिलाते रहेंगे।

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