आलमगीर आलम को बेल पर कांग्रेस का भाजपा पर हमला, बोली- साजिश हुई फेल

‘सत्य की जीत’: आलमगीर आलम को जमानत मिलने पर कांग्रेस का पलटवार

आलमगीर आलम को बेल मिलने पर कांग्रेस का पलटवार, बोली- भाजपा की साजिश हुई नाकाम

रांची: झारखंड के पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता आलमगीर आलम को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने इसे “सत्य की जीत” बताते हुए भाजपा और केंद्रीय जांच एजेंसियों पर तीखा हमला बोला है।

प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सोनाल शांति ने बयान जारी कर कहा कि भाजपा ने झूठे आरोपों के जरिए आलमगीर आलम की साफ-सुथरी राजनीतिक छवि को दागदार करने की कोशिश की, लेकिन न्यायपालिका ने उनकी साजिशों को बेनकाब कर दिया।

“न्याय की पहली सीढ़ी पर मिला सहारा”

सोनाल शांति ने कहा कि भले ही न्याय मिलने में समय लगा, लेकिन अब आलमगीर आलम ने न्याय की पहली सीढ़ी पर मजबूती से कदम रखा है। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियां अदालत में अपने आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत पेश करने में विफल रहीं, जिसके बाद अदालत ने उन्हें जमानत देने का फैसला किया।

कांग्रेस प्रवक्ता ने दावा किया कि यह फैसला भाजपा की राजनीतिक साजिशों पर बड़ा झटका है।

केंद्रीय एजेंसियों पर उठाए सवाल

कांग्रेस ने केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किए। सोनाल शांति ने आरोप लगाया कि भारतीय न्याय संहिता और जांच एजेंसियों का इस्तेमाल अब अपराधियों के खिलाफ कम और विपक्षी नेताओं व आंदोलनकारियों को दबाने के लिए ज्यादा किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यह साफ हो जाएगा कि किस तरह एजेंसियों ने पूरे मामले में न्यायिक प्रक्रिया का “भद्दा मजाक” बनाया।

बाबूलाल मरांडी पर भी साधा निशाना

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस ने पलटवार किया। सोनाल शांति ने कहा कि भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे लोगों के साथ खड़े रहने वालों को दूसरों पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार नहीं है।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बाबूलाल मरांडी यदि अपने राजनीतिक सहयोगियों और राष्ट्रीय नेतृत्व की ओर देखें, तो उन्हें कई दागी चेहरे नजर आएंगे।

जमानत के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल

गौरतलब है कि टेंडर कमीशन घोटाला मामले में गिरफ्तार आलमगीर आलम को हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली है। इसके बाद झारखंड की राजनीति में बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रही है, जबकि भाजपा लगातार भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सरकार को घेर रही है।

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