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असम में हेमंत सोरेन के बयान पर भड़का विपक्ष, Babulal Marandi बोले- “संवैधानिक मर्यादा लांघ रहे सीएम”

रांची/तिनसुकिया: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के असम दौरे के दौरान दिए गए बयानों ने एक नया सियासी बवंडर खड़ा कर दिया है। तिनसुकिया में एक छात्र संगठन के कार्यक्रम में चुनाव आयोग, राजभवन और केंद्र सरकार पर की गई उनकी टिप्पणियों को विपक्ष ने “अमर्यादित” और “संवैधानिक संकट” पैदा करने वाला बताया है।

Babulal Marandi का कड़ा पलटवार

झारखंड विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री Babulal Marandi ने मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जिस संविधान ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाया, उसी की संस्थाओं का वे अपमान कर रहे हैं। मरांडी ने मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर घेरा:

  • छात्रवृत्ति पर चुप्पी: विपक्ष का आरोप है कि राज्य के हजारों छात्र छात्रवृत्ति (Scholarship) के लिए परेशान हैं, लेकिन मुख्यमंत्री अपनी समस्याओं पर बात करने के बजाय संवैधानिक संस्थाओं पर निशाना साध रहे हैं।
  • संस्थाओं का अपमान: मरांडी ने कहा कि चुनाव आयोग को संविधान ने जो अधिकार दिए हैं, उन्हें मुख्यमंत्री “हमला” बता रहे हैं, जो पूरी तरह गलत है।

इतिहास से छेड़छाड़ का आरोप

मुख्यमंत्री द्वारा भगवान बिरसा मुंडा और सिद्धू-कान्हू जैसे महान आदिवासी नायकों के साथ शिबू सोरेन के नाम को जोड़ने पर विपक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई है। भाजपा नेताओं का कहना है कि यह इतिहास को तोड़ने-मरोड़ने की कोशिश है और यह आदिवासी महापुरुषों के बलिदान का अपमान है।

 

राजभवन और भ्रष्टाचार पर घेराबंदी

राजभवन को लेकर मुख्यमंत्री के आरोपों पर पलटवार करते हुए विपक्ष ने याद दिलाया कि:

  • ईडी नोटिस: मुख्यमंत्री ने खुद जमीन घोटाले से जुड़े ईडी के समन की अवहेलना की थी।
  • आधी रात का वाकया: विपक्ष का आरोप है कि राजभवन ने उन्हें तलब नहीं किया था, बल्कि वे खुद कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए वहां पहुंचे थे।
  • भ्रष्टाचार की फेहरिस्त: रांची जमीन घोटाले में चार्जशीट, साहिबगंज खनन घोटाले की सीबीआई जांच और ऊर्जा विभाग में कथित अनियमितताओं का हवाला देते हुए विपक्ष ने सरकार को कटघरे में खड़ा किया है।

“यदि मुख्यमंत्री को वास्तव में संविधान में आस्था है, तो वे अद्यतन मतदाता सूची के आधार पर नगर निकाय चुनाव क्यों नहीं करा रहे? वोट चोरी का आरोप लगाने वाले खुद लोकतंत्र का अपमान कर रहे हैं।” – विपक्ष का आधिकारिक बयान

असम में दिए गए इस भाषण के बाद झारखंड की राजनीति में गर्माहट बढ़ गई है। जहां सत्ता पक्ष इसे आदिवासी अस्मिता की आवाज बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे भ्रष्टाचार से ध्यान भटकाने की एक कोशिश करार दे रहा है।

 

 

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