रांची में RIMS-2 का भूमि पूजन, 110 एकड़ जमीन को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज

1074 करोड़ का RIMS-2 बना विवाद का केंद्र, किसानों ने उठाए जमीन अधिग्रहण पर सवाल

रांची में RIMS-2 परियोजना को लेकर बढ़ा विवाद, भूमि पूजन के बीच किसानों का विरोध तेज

रांची: झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार ने रांची के कांके प्रखंड स्थित नगड़ी क्षेत्र में प्रस्तावित RIMS-2 परियोजना की औपचारिक शुरुआत कर दी है। करीब 110 एकड़ भूमि पर 1074 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस अत्याधुनिक अस्पताल का भूमि पूजन बुधवार को संपन्न हुआ। हालांकि परियोजना की शुरुआत के साथ ही स्थानीय ग्रामीणों का विरोध भी एक बार फिर मुखर होकर सामने आ गया।

सरकार इस परियोजना को राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए “गेम चेंजर” मान रही है। दावा किया जा रहा है कि RIMS-2 के निर्माण के बाद झारखंड के मरीजों को बेहतर इलाज के लिए दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा और राज्य में आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार होगा।

भूमि पूजन के दौरान भारी पुलिस बल तैनात

भूमि पूजन कार्यक्रम को देखते हुए सुबह से ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जमा हो गए थे। किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए प्रशासन ने इलाके में भारी पुलिस बल की तैनाती की थी। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार ग्रामीणों से बातचीत कर स्थिति को सामान्य बनाए रखने की कोशिश करते नजर आए।

किसानों का आरोप: उपजाऊ कृषि भूमि छीनी जा रही

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जिस जमीन पर RIMS-2 का निर्माण प्रस्तावित है, वह उनकी उपजाऊ कृषि भूमि है। वर्षों से इसी जमीन पर खेती कर गांव के कई परिवार अपना जीवनयापन करते आए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि वे विकास या अस्पताल निर्माण के विरोधी नहीं हैं, लेकिन इतनी बड़ी परियोजना को गैर-कृषि भूमि पर स्थापित किया जाना चाहिए ताकि किसानों की आजीविका प्रभावित न हो।

ग्रामीणों का आरोप है कि विकास परियोजनाओं के नाम पर लगातार खेती योग्य जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है, जिससे किसानों के सामने भविष्य में रोजगार और जीवनयापन का संकट खड़ा हो सकता है।

पहले भी हो चुका है विरोध

RIMS-2 परियोजना को लेकर विरोध कोई नया मामला नहीं है। पिछले कई वर्षों से स्थानीय लोग इस परियोजना के खिलाफ अपनी आवाज उठाते रहे हैं।

पिछले वर्ष जून में भी बड़ी संख्या में किसान हल-बैल लेकर प्रस्तावित परियोजना स्थल पर पहुंचे थे और खेती शुरू कर दी थी। विरोध के प्रतीक के तौर पर किसानों ने सड़क काटकर वहां धान की खेती भी की थी। उस दौरान प्रशासन और ग्रामीणों के बीच तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई थी।

सरकार की दलील: स्वास्थ्य सेवाओं में आएगी क्रांति

राज्य सरकार का मानना है कि RIMS-2 बनने के बाद झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं का नया अध्याय शुरू होगा। आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के साथ-साथ मेडिकल शिक्षा और रिसर्च को भी बढ़ावा मिलेगा।

सरकार का दावा है कि इस परियोजना से हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे तथा राज्य के मरीजों को उच्चस्तरीय इलाज के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा।

विकास बनाम आजीविका की बहस

फिलहाल RIMS-2 परियोजना को लेकर दो अलग-अलग तस्वीरें सामने हैं। एक तरफ सरकार इसे राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाली परियोजना बता रही है, तो दूसरी तरफ स्थानीय किसान अपनी जमीन और आजीविका बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं।

अब नजर इस बात पर रहेगी कि प्रशासन और ग्रामीणों के बीच बातचीत से कोई सहमति बनती है या फिर आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा होता है। फिलहाल RIMS-2 परियोजना के साथ विकास और विस्थापन की बहस एक बार फिर केंद्र में आ गई है।

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