छात्र आंदोलन को 60 दिन की मोहलत, मांगें पूरी नहीं हुईं तो फिर होगा बड़ा आंदोलन

झारखंड में JPSC-JSSC छात्र आंदोलन 2 महीने के लिए स्थगित, 60 दिन का अल्टीमेटम; JSSC-CGL अभ्यर्थियों का धरना जारी

झारखंड में छात्रों का आंदोलन 2 महीने के लिए स्थगित, 60 दिन का अल्टीमेटम; JSSC-CGL सफल अभ्यर्थियों का धरना जारी

Ranchi: झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर पिछले 26 दिनों से चल रहा छात्र आंदोलन बुधवार को दो महीने के लिए स्थगित कर दिया गया। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलन कर रहे छात्रों ने राज्य सरकार को अपनी बची हुई मांगों को पूरा करने के लिए 60 दिनों का समय दिया है। छात्रों ने साफ किया है कि तय अवधि में मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन दोबारा शुरू किया जाएगा।

सरकार को 60 दिनों का अल्टीमेटम

JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच के रविंद्र पासवान ने कहा कि छात्रों की बाकी मांगों को पूरा करने के लिए सरकार को दो महीने का समय दिया गया है। इसी के साथ फिलहाल विरोध-प्रदर्शन स्थगित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार को सभी मांगों को पूरी तरह लागू करना होगा। साथ ही जिन भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के आरोप हैं, उनकी जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।

रविंद्र पासवान ने दावा किया कि छात्रों के आंदोलन के बाद सरकार ने 22 परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि यदि अगले दो महीने में सरकार ने छात्रों की मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की, तो आंदोलन पहले से भी ज्यादा मजबूती के साथ शुरू किया जाएगा।

PGD, नगर पालिका और आबकारी समेत अन्य परीक्षाओं को भी रद्द करने की मांग

छात्र नेताओं ने सरकार से उन अन्य परीक्षाओं को भी रद्द करने की मांग की है, जिनमें उन्हें कथित भ्रष्टाचार और अनियमितता की आशंका है।

मंच की ओर से PGD, नगर पालिका, आबकारी, कॉन्स्टेबल और फील्ड वर्कर जैसी परीक्षाओं को भी जांच के दायरे में लाने और जरूरत पड़ने पर रद्द करने की मांग की गई है।

छात्र नेताओं का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बहाल करना जरूरी है, ताकि अभ्यर्थियों को परीक्षा और नियुक्ति व्यवस्था पर भरोसा हो सके।

छात्र नेता बोले- अब मंच बनेगा छात्रों की आवाज

छात्र नेता कुणाल प्रताप सिंह ने कहा कि JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच का जल्द पंजीकरण कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में झारखंड के छात्रों से जुड़े किसी भी मुद्दे को मंच के माध्यम से मजबूती से उठाया जाएगा।

उन्होंने आंदोलन में शामिल छात्रों और युवाओं को भी धन्यवाद दिया और कहा कि लंबे समय तक अनुशासन के साथ आंदोलन जारी रखना बड़ी उपलब्धि है।

पद्मश्री मधु मंसूरी ने तुड़वाया अनशन

आंदोलन के दौरान भूख हड़ताल पर बैठे रूपेश पाल, राहुल क्रांति और सबीता का अनशन पद्मश्री मधु मंसूरी ने जूस पिलाकर समाप्त कराया।

छात्र आंदोलन के दो महीने के लिए स्थगित होने के बाद जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लगाए गए टेंट को भी हटा दिया गया।


JSSC-CGL सफल अभ्यर्थियों का आंदोलन जारी

दूसरी ओर, JSSC-CGL के सफल अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन अभी जारी है। प्रोजेक्ट भवन के बाहर धरने पर बैठे चयनित अभ्यर्थी सरकार से नियुक्तियां रद्द करने के फैसले को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।

अभ्यर्थियों का कहना है कि “कल तक हम सरकारी कर्मचारी थे, आज बेरोजगार हो गए।” उनका आरोप है कि उन्हें कार्यालय में प्रवेश करने से रोका जा रहा है और उनकी नौकरी का भविष्य अनिश्चित हो गया है।

मोबाइल फ्लैश लाइट मार्च निकालकर जताया विरोध

JSSC-CGL के सफल अभ्यर्थियों ने मंगलवार शाम सरकार के फैसले के विरोध में मोबाइल फ्लैश लाइट मार्च निकाला। मार्च प्रोजेक्ट भवन से बिरसा चौक तक निकाला गया।

अभ्यर्थियों ने कहा कि वे अपनी मांग को लेकर सड़क से लेकर अदालत तक लड़ाई लड़ेंगे। उनका कहना है कि जब तक JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने का फैसला वापस नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

बारिश के बीच खुले में बैठे अभ्यर्थी

प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने प्रोजेक्ट भवन के बाहर धरना स्थल के लिए प्रशासन से जगह उपलब्ध कराने की मांग की है। देर रात अभ्यर्थियों ने टेंट लगाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया।

इसके बाद कई अभ्यर्थियों को बारिश के बीच खुले में सड़क किनारे रात बितानी पड़ी। आंदोलन को देखते हुए प्रोजेक्ट भवन और आसपास के इलाकों में पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है।

सरकार ने 17 अगस्त को रद्द की थी JSSC-CGL परीक्षा

गौरतलब है कि झारखंड सरकार ने 17 अगस्त को JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने की घोषणा की थी। इसके साथ ही परीक्षा एजेंसी TDPL द्वारा आयोजित अन्य परीक्षाओं को भी रद्द करने का फैसला लिया गया।

सरकार ने वर्ष 2014 से अब तक हुई भर्ती परीक्षाओं की जांच कराने की बात कही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के अनुसार, SIT और CID की जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं और पूरे मामले में जुड़े नेटवर्क की जांच की जा रही है।

रिटायर्ड जज की निगरानी में जांच की बात

सरकार ने पूरे मामले की जांच रिटायर्ड जज की निगरानी में कराने की बात कही है। मुख्यमंत्री के अनुसार, जांच का उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया में हुई कथित गड़बड़ियों की तह तक पहुंचना और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करना है।

वहीं, हाईकोर्ट के अधिवक्ता विनोद सिंह ने नियुक्त अभ्यर्थियों की नौकरी रद्द करने के फैसले पर कानूनी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि नियुक्ति के बाद बिना अभ्यर्थियों का पक्ष सुने नौकरी समाप्त करना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि अभ्यर्थियों के लिए हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी विकल्प खुले हैं।

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