पटना | बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों (Rajya Sabha Chunav) के लिए होने वाली चुनावी जंग अब बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है। रविवार को पटना में हुई राष्ट्रीय जनता दल (RJD) संसदीय बोर्ड की हाई-प्रोफाइल बैठक में बड़ा फैसला लिया गया।
पार्टी ने उम्मीदवार के चयन का अंतिम अधिकार सर्वसम्मति से सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव को सौंप दिया है।
Rajya Sabha Chunav: नामांकन के अंतिम दिन होगा खुलासा
तेजस्वी यादव के 1, पोलो रोड स्थित आवास पर हुई इस बैठक में तय किया गया कि आरजेडी अपने उम्मीदवारों के नाम का खुलासा 5 मार्च को करेगी, जो नामांकन दाखिल करने का अंतिम दिन है।
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बैठक का स्वरूप: पहले राज्य संसदीय बोर्ड और फिर केंद्रीय संसदीय बोर्ड की बैठक हुई। दिल्ली में मौजूद लालू यादव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस मंथन में शामिल हुए।
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रणनीतिक चुप्पी: पार्टी ने फिलहाल किसी नाम पर मुहर नहीं लगाई है, जिससे कयासों का बाजार गर्म है। चर्चा यह भी है कि क्या खुद तेजस्वी यादव राज्यसभा जा सकते हैं?
संख्या बल का गणित और ‘ओवैसी’ फैक्टर
आरजेडी के लिए राज्यसभा की राह आसान नहीं है। बिहार विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों के हिसाब से एक सीट जीतने के लिए 41 वोटों की जरूरत है।
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महागठबंधन की स्थिति: आरजेडी (25) और सहयोगियों (10) को मिलाकर संख्या 35 तक पहुंचती है। जीत के लिए 6 अतिरिक्त वोटों की दरकार है।
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AIMIM और BSP पर नजर: तेजस्वी की नजर असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM (5 विधायक) और मायावती की बसपा (1 विधायक) पर है। हालांकि, ओवैसी की पार्टी पहले ही अपना उम्मीदवार उतारने का ऐलान कर चुकी है, जिससे विपक्षी खेमे में पेंच फंसा हुआ है।
Rajya Sabha Chunav: पांचवीं सीट पर ‘खेला’ होने के आसार
बिहार की 5 सीटों में से 4 पर एनडीए की जीत पक्की मानी जा रही है, लेकिन पांचवीं सीट को लेकर घमासान तेज है।
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NDA की चुनौती: सत्ताधारी गठबंधन को भी पांचवीं सीट के लिए 3 अतिरिक्त वोटों की जरूरत है।
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क्रॉस वोटिंग का खतरा: दोनों ही गठबंधन अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं। ऐसे में 16 मार्च को होने वाले मतदान के दौरान भारी ‘क्रॉस वोटिंग’ की आशंका जताई जा रही है।
महत्वपूर्ण तिथियां:
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नामांकन की अंतिम तिथि: 5 मार्च, 2026
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मतदान की तिथि: 16 मार्च, 2026
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परिणाम: 16 मार्च (शाम तक)
आरजेडी द्वारा आखिरी दिन पत्ता खोलने की रणनीति विपक्षी दलों और सत्ता पक्ष दोनों को पसोपेश में डालने वाली है। क्या लालू यादव कोई ‘सोशल इंजीनियरिंग’ वाला कार्ड खेलेंगे या किसी दिग्गज को सदन भेजेंगे, यह 5 मार्च को ही साफ होगा।



