
परिमल नाथवाणी की एंट्री से बदला राज्यसभा चुनाव का खेल, सीएम हेमंत सोरेन से मुलाकात के बाद बढ़ी सियासी हलचल
रांची: झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां लगातार तेज हो रही हैं। इसी बीच शनिवार को एक अप्रत्याशित घटनाक्रम ने चुनावी माहौल को और दिलचस्प बना दिया। राज्य से दो बार राज्यसभा सांसद रह चुके उद्योगपति और वरिष्ठ राजनीतिक रणनीतिकार परिमल नाथवाणी अचानक रांची पहुंचे और सीधे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास जाकर उनसे मुलाकात की।
इस मुलाकात के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। खास बात यह है कि मुख्यमंत्री से मुलाकात से पहले नाथवाणी के वकील द्वारा विधानसभा पहुंचकर राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र खरीदे जाने की जानकारी भी सामने आई है।
निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर उतरने की चर्चा
सूत्रों के अनुसार, परिमल नाथवाणी इस बार राज्यसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतर सकते हैं। हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन उनके कदमों ने राजनीतिक दलों की चिंता जरूर बढ़ा दी है।
अब तक मुकाबला मुख्य रूप से झामुमो, कांग्रेस और भाजपा के संभावित उम्मीदवारों के बीच माना जा रहा था, लेकिन नाथवाणी की संभावित एंट्री ने चुनाव को नया मोड़ दे दिया है।
सीएम आवास की मुलाकात के राजनीतिक मायने
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से नाथवाणी की मुलाकात महज शिष्टाचार भेंट नहीं हो सकती। राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले हुई इस मुलाकात को कई राजनीतिक संकेतों से जोड़कर देखा जा रहा है।
हालांकि मुलाकात में क्या चर्चा हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन इससे राजनीतिक अटकलों का बाजार गर्म हो गया है।
क्यों बढ़ी राजनीतिक दलों की धड़कनें?
परिमल नाथवाणी झारखंड की राजनीति और विधानसभा के अंकगणित से अच्छी तरह परिचित माने जाते हैं। वे पहले भी राज्यसभा चुनाव में सफल रणनीति के जरिए जीत हासिल कर चुके हैं।
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि उनके पास निर्दलीय और छोटे दलों के विधायकों के बीच मजबूत संपर्क हैं। ऐसे में यदि वे चुनाव मैदान में उतरते हैं तो वोटों का समीकरण पूरी तरह बदल सकता है।
त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना
झारखंड में इस बार राज्यसभा की दो सीटों पर चुनाव होना है। झामुमो ने पहले ही बैद्यनाथ राम को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है, जबकि कांग्रेस ने प्रणव झा को उम्मीदवार बनाया है। भाजपा की ओर से भी उम्मीदवार के नाम को लेकर चर्चा जारी है।
ऐसे में यदि परिमल नाथवाणी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरते हैं तो मुकाबला और रोचक हो सकता है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि उनकी एंट्री चुनाव को सीधे मुकाबले से निकालकर एक त्रिकोणीय राजनीतिक संघर्ष में बदल सकती है।
अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या परिमल नाथवाणी वास्तव में नामांकन दाखिल करते हैं और यदि करते हैं तो उन्हें किस राजनीतिक खेमे का समर्थन मिलता है। आने वाले 48 घंटे झारखंड की राजनीति के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।



