HeadlinesJharkhandStatesTrending

40 दीयों से रोशन होगा मुड़मा जतरा, आदिवासी एकता और परंपरा का दिखेगा संगम

मुड़मा जतरा में दिखेगी आदिवासी संस्कृति की झलक, 40 पड़हा के प्रतिनिधि होंगे शामिल

Mudma Jatra 2026: 40 पड़हा के 40 दीयों से रोशन होगा मुड़मा जतरा, आदिवासी एकता और परंपरा का दिखेगा संगम

रांची: झारखंड की आदिवासी सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक आस्था और पारंपरिक एकता का प्रतीक ऐतिहासिक मुड़मा जतरा इस वर्ष 27 और 28 अक्टूबर को आयोजित किया जाएगा। जतरा का उद्घाटन 27 अक्टूबर को शाम 5 बजे मांडर स्थित जतरा स्थल के शक्ति खूंटा के पास 40 पड़हा के प्रतीक स्वरूप 40 दीये जलाकर किया जाएगा। इस आयोजन में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ आदिवासी समाज की एकजुटता और सांस्कृतिक पहचान को प्रदर्शित किया जाएगा।

आयोजकों के अनुसार, उद्घाटन और समापन समारोह के लिए झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित अन्य गणमान्य लोगों को आमंत्रित किया गया है।

शक्ति खूंटा के पास 40 दीये जलाकर होगी शुरुआत

मुड़मा जतरा के उद्घाटन समारोह में 40 पड़हा के पड़हा राजा, पाहन-पुजार और अन्य धार्मिक-सामाजिक प्रतिनिधि पारंपरिक वेशभूषा और रीति-रिवाजों के साथ शामिल होंगे। इनमें राजी पाहन और राजी बेल भी शामिल रहेंगे।

सभी प्रतिनिधि 40 दीये लेकर शक्ति खूंटा स्थल पर एकत्र होंगे। इसके बाद दीप प्रज्वलन के साथ जतरा की शुरुआत की जाएगी। समारोह में 40 पड़हा के दीवान और आमंत्रित मुख्य अतिथियों के संबोधन का भी कार्यक्रम है।

आदिवासी एकता और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है मुड़मा जतरा

मुड़मा जतरा केवल धार्मिक आयोजन या मेले तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे आदिवासी समाज की पारंपरिक व्यवस्था, सांस्कृतिक पहचान और सामुदायिक एकजुटता से जुड़े महत्वपूर्ण आयोजन के रूप में देखा जाता है। इसमें 40 पड़हा की भागीदारी इसकी प्रमुख विशेषता है।

झारखंड के अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले पारंपरिक प्रतिनिधि और ग्रामीण अपने रीति-रिवाजों के साथ इस आयोजन में हिस्सा लेते हैं। मांदर-नगाड़ों की थाप, पारंपरिक वेशभूषा और सामूहिक भागीदारी जतरा के सांस्कृतिक स्वरूप को खास बनाती है।

दूसरे राज्यों और विदेशों से भी श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद

आयोजकों को उम्मीद है कि इस वर्ष भी झारखंड के विभिन्न जिलों के साथ दूसरे राज्यों और विदेशों से श्रद्धालु मुड़मा जतरा में शामिल होने पहुंचेंगे। बड़ी संख्या में लोगों के आने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा, यातायात और विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन से सहयोग मांगा गया है।

आयोजकों ने जतरा से दो दिन पहले से लेकर दो दिन बाद तक आवश्यक व्यवस्थाएं बनाए रखने का आग्रह किया है, ताकि श्रद्धालुओं और आगंतुकों को किसी तरह की परेशानी न हो।

सामाजिक विवादों और पारंपरिक व्यवस्था पर भी होगी चर्चा

जतरा के दौरान धार्मिक और सामाजिक विषयों पर विचार-विमर्श किए जाने की भी तैयारी है। समुदाय के भीतर आपसी विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाने के प्रयास के साथ जतरा स्थल के संरक्षण से जुड़े मुद्दे भी उठाए जाएंगे।

आयोजकों की ओर से अनुसूचित क्षेत्रों से संबंधित विषयों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करने की तैयारी है। इस तरह मुड़मा जतरा में धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक उत्सव के साथ आदिवासी समाज की पारंपरिक व्यवस्था, अधिकारों और ऐतिहासिक स्थल के संरक्षण से जुड़े मुद्दे भी चर्चा में रहेंगे।

तारीख: 27 और 28 अक्टूबर 2026
स्थान: मुड़मा जतरा स्थल, मांडर, रांची
उद्घाटन: 27 अक्टूबर, शाम 5 बजे
मुख्य आकर्षण: 40 पड़हा के प्रतीक स्वरूप 40 दीयों का प्रज्वलन

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button