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सुरक्षा कटौती पर भड़के सांसद Pappu Yadav, गृह मंत्री और DGP को घेरा

पूर्णिया से निर्दलीय सांसद Pappu Yadav और बिहार सरकार के बीच तल्खी एक बार फिर चरम पर है। अपनी सुरक्षा में की गई कटौती से नाराज सांसद ने सरकार पर उनकी ‘हत्या की साजिश’ रचने का गंभीर आरोप लगाया है।

उन्होंने सीधे तौर पर गृह मंत्री और डीजीपी से सवाल किया है कि उनकी सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किसके इशारे पर किया जा रहा है।

सुरक्षा में कटौती: BMP जवानों को हटाया गया

पप्पू यादव का दावा है कि उनकी वाई (Y) श्रेणी की सुरक्षा के बावजूद, उनके सुरक्षा घेरे से बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस (BMP) के जवानों को हटा दिया गया है।

  • सांसद का सवाल: “सुरक्षा घटाने का मौखिक आदेश किसने जारी किया? क्या अब मेरी सुरक्षा में होमगार्ड तैनात किए जाएंगे? अगर मारना ही है तो मार ही दो, यह सुरक्षा हटाने का नाटक क्यों?”

  • बदले की कार्रवाई: सहरसा में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने इसे ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ बताया। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि विपक्ष अपंग हो जाए ताकि उनकी नाकामियों पर कोई आवाज न उठा सके।

लगातार घटाई जा रही है सिक्योरिटी: Pappu Yadav

सांसद ने क्रमवार तरीके से सुरक्षा में कमी किए जाने का ब्योरा दिया:

  1. सितंबर 2025: सुरक्षा को ‘वाई प्लस’ से घटाकर ‘वाई’ श्रेणी का किया गया।

  2. मधेपुरा/पूर्णिया: पहले मधेपुरा से सुरक्षा हटाई गई, फिर पूर्णिया में तैनात तीन SLR (सेल्फ लोडिंग राइफल) धारी जवानों को वापस बुलाया गया।

  3. ताजा मामला: अब आनन-फानन में BMP जवानों को हटा लिया गया है।

पप्पू यादव ने कहा कि उन्होंने इस मामले को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे।

नीट छात्रा मामले और गिरफ्तारी से जुड़ा विवाद

सांसद की यह नाराजगी उनकी हालिया गिरफ्तारी के बाद और बढ़ गई है।

  • 31 साल पुराना मामला: हाल ही में पटना पुलिस ने उन्हें मकान कब्जा करने के एक पुराने मामले में गिरफ्तार किया था, जिसके बाद उन्हें एक सप्ताह बेऊर जेल में रहना पड़ा।

  • साजिश का आरोप: पप्पू यादव का कहना है कि उन्होंने पटना के एक हॉस्टल में जहानाबाद की नीट (NEET) छात्रा के कथित यौन शोषण और हत्या के खिलाफ आवाज उठाई थी, इसलिए सरकार ने उन्हें जेल भेजा और अब उनकी सुरक्षा हटाकर अपराधियों को ‘खुली छूट’ दे रही है।

Pappu Yadav अपनी जान के खतरे को लेकर लगातार मुखर रहे हैं। सुरक्षा में इस कटौती ने बिहार की सियासत में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है, जहां एक तरफ सरकार इसे प्रशासनिक प्रक्रिया बता रही है, वहीं विपक्ष इसे लोकतांत्रिक आवाज को दबाने की कोशिश करार दे रहा है।

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