
झारखंड राज्यसभा चुनाव: दिल्ली में दौड़, रांची में ‘नो सिग्नल’; कांग्रेस नेताओं की बढ़ी धड़कनें
रांची: Jharkhand की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर सस्पेंस लगातार गहराता जा रहा है।
एक तरफ Indian National Congress राज्यसभा की एक सीट पर अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटी है, तो दूसरी ओर सहयोगी दल Jharkhand Mukti Morcha (झामुमो) की चुप्पी ने कांग्रेस खेमे की बेचैनी बढ़ा दी है।
राजनीतिक गलियारों में इन दिनों “वेटिंग फॉर द सिग्नल” की चर्चा जोरों पर है। कांग्रेस नेताओं को अब भी झामुमो की ओर से अंतिम संकेत का इंतजार है।
झामुमो की चुप्पी से कांग्रेस में बेचैनी
सूत्रों के मुताबिक झामुमो ने कांग्रेस नेताओं को “दो-तीन दिन में बात” करने का भरोसा दिया था, लेकिन तय समय बीतने के बाद भी तस्वीर साफ नहीं हो सकी है।
झामुमो नेतृत्व फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति पर चल रहा है, क्योंकि विधानसभा में नंबर गेम उसके पक्ष में है। वहीं कांग्रेस के दावेदार लगातार दिल्ली और रांची के बीच संपर्क साधने में जुटे हुए हैं।
दिल्ली दरबार में तेज हुई लॉबिंग
रांची में सियासी संकेत नहीं मिलने के बाद कांग्रेस नेताओं ने दिल्ली दरबार की दौड़ तेज कर दी है।
बताया जा रहा है कि कई वरिष्ठ नेता पार्टी हाईकमान और शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर अपनी दावेदारी मजबूत करने में लगे हैं। कांग्रेस नेताओं को उम्मीद है कि दिल्ली से मिलने वाला राजनीतिक संकेत झामुमो के रुख को प्रभावित कर सकता है।
नामांकन काउंटर पर सन्नाटा
राज्यसभा चुनाव के लिए विधानसभा में नामांकन पत्रों की बिक्री शुरू हो चुकी है, लेकिन कांग्रेस की ओर से अब तक कोई बड़ा चेहरा खुलकर सामने नहीं आया है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि जब तक झामुमो की सहमति नहीं मिलती, तब तक कांग्रेस के दावेदार नामांकन प्रक्रिया में खुलकर आगे नहीं बढ़ना चाहते।
कांग्रेस में दावेदारों की लंबी सूची
राज्यसभा सीट को लेकर कांग्रेस के भीतर कई बड़े नेताओं के नाम चर्चा में हैं। इनमें प्रमुख रूप से—
- Furkan Ansari
- Subodh Kant Sahay
- Pradeep Balmuchu
- Keshav Mahto Kamlesh
- Dayamani Barla
जैसे नाम शामिल हैं।
अल्पसंख्यक, आदिवासी, संगठन और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखकर सभी नेता अपनी-अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं।
अब नजर झामुमो के फैसले पर
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि झारखंड राज्यसभा चुनाव में असली फैसला झामुमो नेतृत्व के रुख पर निर्भर करेगा।
अब देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस की दिल्ली दौड़ रंग लाती है या फिर यह पूरा सियासी खेल सिर्फ इंतजार और अटकलों तक सीमित रह जाता है।



