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Jharkhand Public Service Commission बना विवादों का अड्डा? 20 साल में 11 बड़ी परीक्षाएं सवालों के घेरे में

JPSC या विवादों का हेडक्वार्टर? 11 परीक्षाओं में गड़बड़ी का लंबा इतिहास

JPSC: नौकरी की फैक्ट्री या विवादों का हेडक्वार्टर? 20 साल में 11 बड़ी परीक्षाएं सवालों के घेरे मे

झारखंड में Jharkhand Public Service Commission (JPSC) का नाम आते ही विवादों की लंबी फेहरिस्त सामने आ जाती है। राज्य गठन के बाद से ही यह संस्था जहां युवाओं के भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी निभाने के लिए बनी थी, वहीं अब यह लगातार आरोपों, गड़बड़ियों और अदालती मामलों के कारण सवालों के घेरे में है। ताजा मामला झारखंड पात्रता परीक्षा (JET) का है, जिसने एक बार फिर आयोग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

18 साल बाद हुई JET, लेकिन व्यवस्था फेल

करीब 18 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद आयोजित JET परीक्षा से अभ्यर्थियों को काफी उम्मीदें थीं। लेकिन रांची और बोकारो से सामने आई अव्यवस्थाओं ने इन उम्मीदों को झटका दे दिया। बोकारो के एक परीक्षा केंद्र में एजुकेशन विषय के प्रश्नपत्र कम पड़ गए, जिसके कारण परीक्षा रद्द करनी पड़ी। यह घटना आयोग की तैयारी और प्रबंधन पर बड़ा सवाल है।

शुरुआत से ही विवादों का साया

JPSC का इतिहास देखें तो लगभग हर बड़ी परीक्षा विवादों से घिरी रही है:

  • प्रथम और द्वितीय JPSC: चयन प्रक्रिया में ‘पिक एंड चूज’ नीति और भ्रष्टाचार के आरोप लगे। दूसरे JPSC में तत्कालीन अध्यक्ष Dilip Prasad सहित कई सदस्य जेल गए। मामला CBI तक पहुंचा और कई अधिकारियों की सेवाएं समाप्त करनी पड़ीं।
  • तीसरी और चौथी परीक्षा: आरक्षण नियमों की अनदेखी और कॉपियों के मूल्यांकन में गड़बड़ी के आरोप लगे। मामला कोर्ट तक गया और नियुक्तियां वर्षों तक अटकी रहीं।
  • छठी JPSC: राज्य की सबसे विवादित परीक्षा मानी जाती है। मेरिट लिस्ट तैयार करने के तरीके पर छात्रों ने विरोध किया। बाद में हाईकोर्ट ने रिजल्ट रद्द कर नई मेरिट लिस्ट बनाने का आदेश दिया।
  • 7वीं से 10वीं JPSC: कई केंद्रों से एक ही कमरे में बैठे अभ्यर्थियों के क्रमवार पास होने के आरोप लगे। 49 अभ्यर्थियों की OMR शीट गायब होने के बावजूद उन्हें सफल घोषित कर दिया गया था।
  • 11वीं JPSC: हालिया परीक्षा में पेपर लीक के गंभीर आरोप लगे, जिसके बाद राज्यभर में विरोध प्रदर्शन हुए।

हर बार दोहराई जाती हैं गलतियां

हर परीक्षा के बाद सुधार के दावे किए जाते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि गड़बड़ियां लगातार सामने आती रही हैं। JET परीक्षा में भी प्रश्नपत्र की कमी, तकनीकी खामियां और प्रबंधन की विफलता ने यह साफ कर दिया कि सिस्टम में अभी भी बड़े सुधार की जरूरत है।

युवाओं के भविष्य पर सवाल

JPSC की परीक्षाएं सिर्फ एक भर्ती प्रक्रिया नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के सपनों से जुड़ी होती हैं। बार-बार हो रही गड़बड़ियों से न सिर्फ उम्मीदवारों का भरोसा टूट रहा है, बल्कि राज्य की भर्ती प्रणाली की साख भी प्रभावित हो रही है।

क्या सुधरेगा सिस्टम?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या JPSC अपने कामकाज में पारदर्शिता और विश्वसनीयता ला पाएगा, या फिर यह संस्था आगे भी विवादों का केंद्र बनी रहेगी।

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