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JPSC-JSSC परीक्षा धांधली: CID जांच में 25 गिरफ्तार, हाईकोर्ट के स्टे से बदला पूरा मामला

JPSC-JSSC Scam: 25 गिरफ्तारियों से हाईकोर्ट के स्टे तक, जानिए परीक्षा विवाद का पूरा घटनाक्रम

JPSC-JSSC परीक्षा धांधली मामला: CID जांच में 25 गिरफ्तार, पूर्व JPSC अध्यक्ष से लेकर परीक्षा एजेंसियों तक पहुंची जांच

Ranchi: झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितता, पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी को लेकर जांच और कार्रवाई का सिलसिला लगातार जारी है। CID की जांच में अब तक पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते समेत 25 आरोपियों की गिरफ्तारी की बात सामने आई है। वहीं, इस पूरे मामले को लेकर राज्य में करीब एक महीने तक छात्रों का आंदोलन चला, जिसके बाद सरकार ने कई परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया।

हालांकि, रद्द की गई परीक्षाओं को लेकर मामला अब अदालत तक पहुंच चुका है। 11वीं-13वीं JPSC और JSSC-CGL परीक्षा से जुड़ी नियुक्तियों को रद्द करने के सरकारी फैसले पर झारखंड हाईकोर्ट अंतरिम रोक लगा चुका है।

नेपाल तक पहुंचा परीक्षा फर्जीवाड़े का कनेक्शन

CID की जांच के दौरान कथित परीक्षा सिंडिकेट के अंतरराज्यीय नेटवर्क का भी खुलासा हुआ। जांच में नेपाल ले जाकर अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र और उत्तर रटवाने के आरोप सामने आए। रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल जाने वाले 28 अभ्यर्थियों को डिबार किया गया था।

JPSC मामले की जांच के दौरान TDPL से जुड़े अधिकारियों की गिरफ्तारी के बाद भी जांच आगे बढ़ी। रामवीर सिंह, अभय तिवारी और श्वेता गुप्ता समेत कई लोगों से पूछताछ के बाद कथित परीक्षा नेटवर्क की अलग-अलग कड़ियों को जोड़ने का प्रयास किया गया।

जांच का दायरा JSSC-CGL और JPSC तक सीमित नहीं रहा, बल्कि FRO, CDPO, 11वीं-13वीं JPSC और अन्य भर्ती परीक्षाएं भी जांच के दायरे में आईं।

21 जुलाई से शुरू हुई कार्रवाई

CID ने 21 जुलाई 2026 को CID थाना कांड संख्या 16/2026 दर्ज किया। इसके बाद JPSC कार्यालय में छापेमारी की गई। उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता समेत कई लोगों से पूछताछ और हिरासत की कार्रवाई हुई। इसी दौरान तत्कालीन JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने अपने पद से इस्तीफा दिया।

इसके बाद CID ने पूर्व अध्यक्ष के आवास पर भी छापेमारी की और पूछताछ का सिलसिला आगे बढ़ाया।

छात्रों ने शुरू किया आंदोलन

भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के विरोध में छात्रों ने जुलाई के अंतिम सप्ताह से आंदोलन तेज किया। आंदोलन पहले मोरहाबादी स्थित बापू वाटिका से शुरू हुआ और बाद में जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में स्थानांतरित किया गया।

इस दौरान छात्रों ने संविधान यात्रा, कैंडल मार्च, मशाल मार्च और फ्लैश लाइट मार्च सहित कई कार्यक्रम आयोजित किए।

सरकार ने बनाई मंत्रियों की कमेटी

आंदोलन के बढ़ने के बाद राज्य सरकार ने चार मंत्रियों की उच्चस्तरीय कमेटी गठित की। सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की वार्ता हुई।

9 अगस्त को सरकार ने आंदोलन के बीच 14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया। इसके बाद भी छात्रों का आंदोलन जारी रहा और वे भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार की मांग करते रहे।

22 परीक्षाएं रद्द होने से बढ़ा विवाद

18 अगस्त को राज्य सरकार ने कथित अनियमितताओं और जांच रिपोर्ट के आधार पर JSSC-CGL, 11वीं-13वीं JPSC समेत कुल 22 प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की।

सरकार के इस फैसले के बाद एक ओर आंदोलन कर रहे छात्रों ने इसे अपनी बड़ी जीत बताया, वहीं इन परीक्षाओं के जरिए नियुक्त हुए अधिकारियों और कर्मचारियों ने फैसले का विरोध शुरू कर दिया।

हाईकोर्ट पहुंचा मामला

परीक्षा और नियुक्तियां रद्द किए जाने के फैसले के खिलाफ प्रभावित अभ्यर्थियों ने झारखंड हाईकोर्ट का रुख किया।

20 अगस्त को हाईकोर्ट ने 11वीं-13वीं JPSC भर्ती प्रक्रिया रद्द करने के सरकारी फैसले पर रोक लगाई। इसके अगले दिन, 21 अगस्त को JSSC-CGL के जरिए हुई नियुक्तियों को रद्द करने के आदेश पर भी हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी।

इससे नियुक्त हो चुके अभ्यर्थियों को फिलहाल बड़ी राहत मिली है।

26 दिन बाद छात्रों ने स्थगित किया आंदोलन

सरकार के साथ बातचीत और कई परीक्षाओं को रद्द किए जाने के बाद 19 अगस्त को JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच ने करीब 26 दिनों से चल रहे आंदोलन को दो महीने के लिए स्थगित करने की घोषणा की।

छात्र नेताओं ने सरकार को अपनी बाकी मांगें पूरी करने के लिए दो महीने का समय दिया है। उनका कहना है कि यदि तय अवधि में मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन दोबारा शुरू किया जाएगा।

दो SIT कर रही हैं जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने अलग-अलग परीक्षाओं की जांच के लिए दो SIT गठित की हैं।

  • JPSC मामले की SIT: ADG मनोज कौशिक के नेतृत्व में
  • JSSC-CGL मामले की SIT: IG अनूप बिरथरे के नेतृत्व में
  • जांच की समय-सीमा: 60 दिन में रिपोर्ट देने का निर्देश

अब इस पूरे मामले में CID और SIT की जांच, हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई और सरकार की ओर से परीक्षा व्यवस्था में प्रस्तावित सुधार पर सबकी नजर है।

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