रांची में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणामों पर अपनी स्पष्ट राजनीतिक रणनीति सामने रखी। पार्टी के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने नतीजों के बहाने न सिर्फ केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधा, बल्कि विपक्षी एकजुटता को लेकर भी बड़ा संदेश दिया।
‘कीवी’ वाला मेटाफर, विपक्ष को मजबूत करने का दावा: JMM
सुप्रियो भट्टाचार्य ने विपक्ष की भूमिका को समझाने के लिए दिलचस्प उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जैसे शरीर में प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए कीवी फल फायदेमंद होता है, उसी तरह JMM विपक्षी गठबंधन की ताकत बढ़ाने का काम करेगी। उनका कहना था कि JMM “इंडिया गठबंधन” के भीतर एक ऐसी शक्ति बनेगी, जो प्रतिरोध क्षमता और नेतृत्व दोनों को मजबूती देगी।
केंद्र सरकार और एजेंसियों पर आरोप: JMM
प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए।
- पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों को उन्होंने “असंवैधानिक” बताया
- आरोप लगाया कि लाखों मतदाताओं को वोटिंग से वंचित किया गया
- केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग से जनादेश प्रभावित होने की बात कही
असम चुनाव और परिसीमन पर टिप्पणी: JMM
असम के चुनाव नतीजों को लेकर भी उन्होंने बड़ा बयान दिया।
- परिसीमन को नतीजों का अहम कारण बताया
- कहा कि हेमंत सोरेन के नेतृत्व में JMM ने पहली बार असम की 17 सीटों पर चुनाव लड़ा
- 10 सीटों पर पार्टी तीसरे स्थान पर रही, जिसे उन्होंने भविष्य की संभावनाओं का संकेत बताया
झारखंड में परिसीमन पर नजर: JMM
झारखंड में संभावित परिसीमन को लेकर JMM पूरी तरह सतर्क नजर आ रही है।
- पार्टी ने कहा कि वह आंतरिक रूप से तैयार है
- भरोसा जताया कि एसटी सीटों में कमी नहीं होगी
- लेकिन असम जैसी जनसांख्यिकीय बदलाव की कोशिशों को लेकर चिंता भी जताई
राष्ट्रीय राजनीति की ओर बढ़ता JMM
JMM ने साफ संकेत दिया कि अब वह सिर्फ क्षेत्रीय दल नहीं रहना चाहती, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार है। दक्षिण भारत में कांग्रेस की मजबूती और नए राजनीतिक चेहरों के उभरने का स्वागत करते हुए पार्टी ने अपने विस्तार की रणनीति को भी स्पष्ट किया।
चुनावी नतीजों के बाद JMM का यह बयान बताता है कि पार्टी अब खुद को विपक्षी राजनीति के केंद्र में स्थापित करने की कोशिश कर रही है। “कीवी मॉडल” के जरिए दिया गया संदेश सिर्फ बयान नहीं, बल्कि आने वाले राजनीतिक समीकरणों का संकेत भी माना जा रहा है।



