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झारखंड में शिक्षा का बड़ा विस्तार, 765 स्कूल बनेंगे प्लस-टू,

1100 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करेगी सरकार

झारखंड में शिक्षा का बड़ा विस्तार, 765 स्कूल होंगे प्लस-टू में अपग्रेड, 1100 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करेगी सरकार

 

रांची। झारखंड में स्कूली शिक्षा को मजबूत करने और ड्रॉप आउट दर को कम करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मंजूरी के बाद राज्य के 765 हाई स्कूल और मिडिल स्कूलों को प्लस-टू विद्यालय के रूप में अपग्रेड किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी योजना पर सरकार 1100 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करेगी।

 

सरकार का उद्देश्य ग्रामीण, दुर्गम और शैक्षणिक रूप से पिछड़े इलाकों में छात्रों को स्थानीय स्तर पर ही उच्चतर माध्यमिक शिक्षा उपलब्ध कराना है, ताकि मैट्रिक के बाद पढ़ाई छोड़ने की समस्या पर अंकुश लगाया जा सके।

 

दूरी की वजह से नहीं छूटेगी पढ़ाई

 

राज्य के कई पंचायतों और प्रखंडों में प्लस-टू विद्यालय नहीं होने के कारण छात्र-छात्राओं, खासकर बेटियों को 10वीं के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ती थी। परिवहन और संसाधनों की कमी भी बड़ी बाधा थी। अब स्थानीय स्तर पर प्लस-टू शिक्षा की सुविधा मिलने से विद्यार्थियों को दूसरे शहरों या दूर-दराज के क्षेत्रों में नहीं जाना पड़ेगा।

 

आधारभूत संरचना पर खर्च होंगे 509 करोड़ रुपये

 

योजना के तहत प्रत्येक स्कूल के विकास के लिए करीब 66.53 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। हर विद्यालय में चार नए कमरे बनाए जाएंगे और आधुनिक बेंच-डेस्क की व्यवस्था की जाएगी। 765 विद्यालयों के निर्माण और आधारभूत ढांचे के विकास पर कुल 509 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

 

इसके अलावा प्राचार्य और माध्यमिक आचार्य के पद सृजित किए जाएंगे। शिक्षकों और अन्य कर्मियों के वेतन मद में हर वर्ष करीब 600 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा। इस तरह पूरी योजना पर सालाना 1109 करोड़ रुपये से अधिक का व्यय होगा।

 

इन मानकों के आधार पर होगा स्कूलों का चयन

 

राज्य सरकार ने स्कूलों के चयन के लिए कुछ मानक तय किए हैं। जिन स्कूलों के पास कम से कम एक एकड़ भूमि उपलब्ध होगी, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा पहाड़ी, जंगल, पठारी और नदी से घिरे ऐसे क्षेत्रों के विद्यालयों को भी प्राथमिकता मिलेगी, जहां उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की सुविधा उपलब्ध नहीं है।

 

चयन के लिए यह भी जरूरी होगा कि संबंधित क्षेत्र के तीन किलोमीटर के दायरे में आठवीं कक्षा में कम से कम 100 विद्यार्थी नामांकित हों।

 

जिला और राज्य स्तर पर होगी समीक्षा

 

स्कूलों के चयन के लिए उपायुक्त (डीसी) की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति प्रस्ताव तैयार करेगी। इसके बाद माध्यमिक शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता वाली राज्य स्तरीय समिति अंतिम निर्णय लेगी।

 

सरकार का मानना है कि इस पहल से न केवल ड्रॉप आउट दर में कमी आएगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा का बेहतर अवसर भी मिलेगा।

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