Jharkhand News: झारखंड में राज्यसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। दो सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपनी रणनीति तेज कर दी है। इस बार का चुनाव सिर्फ सांसद चुनने तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक ताकत की बड़ी परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है।
NDA के सामने संख्या का संकट: Jharkhand News
राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 28 विधायकों के प्रथम वरीयता मतों की जरूरत होती है, जबकि NDA के पास फिलहाल 24 विधायक हैं। ऐसे में भाजपा को अपनी सीट निकालने के लिए अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा। राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर क्रॉस वोटिंग और “अंतरात्मा की आवाज” जैसी चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर धनबल और दबाव की आशंका जताई है।
महागठबंधन के पास मजबूत गणित: Jharkhand News
दूसरी ओर JMM-कांग्रेस-राजद और वामदलों के महागठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं, जो दोनों सीटों पर जीत का मजबूत आधार माना जा रहा है। हालांकि अंदरखाने सीट बंटवारे को लेकर मंथन जारी है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता टिकट की दौड़ में बताए जा रहे हैं। वहीं JMM भी दोनों सीटों पर दावा ठोकने की स्थिति में नजर आ रही है।
दिल्ली तक पहुंचा टिकट का मामला: Jharkhand News
राज्यसभा टिकट को लेकर नेताओं की सक्रियता दिल्ली तक पहुंच गई है। संभावित उम्मीदवार लगातार पार्टी आलाकमान से संपर्क साध रहे हैं। राजनीतिक चर्चाओं में कई वरिष्ठ नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं, जिससे सियासी सरगर्मी और बढ़ गई है।
भाजपा के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई: Jharkhand News
इस चुनाव को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू के लिए भी बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद यह उनका पहला बड़ा राजनीतिक टेस्ट है। अगर भाजपा संख्या के अभाव के बावजूद सीट निकालने में सफल रहती है, तो यह पार्टी के लिए बड़ा मनोवैज्ञानिक बढ़त माना जाएगा।
गठबंधन की एकता पर भी नजर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर महागठबंधन में सीटों को लेकर सहमति नहीं बनती, तो इसका असर भविष्य की राजनीति पर भी पड़ सकता है। वहीं NDA अगर कोई बड़ा राजनीतिक समीकरण बना लेता है, तो राज्य की राजनीति में नया मोड़ आ सकता हैI झारखंड का यह राज्यसभा चुनाव अब सिर्फ एक संसदीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिष्ठा, रणनीति और गठबंधन की मजबूती की परीक्षा बन गया है। आने वाले दिनों में उम्मीदवारों के नाम और दलों की चालें राज्य की राजनीति को और दिलचस्प बना सकती हैं।



