Jharkhand News: झारखंड में बालू घाटों का टेंडर अब तक नहीं होने से अवैध कारोबार अपने चरम पर पहुंच गया है। राजधानी रांची समेत पूरे राज्य में बिना किसी आधिकारिक अनुमति के बड़े पैमाने पर बालू का उठाव हो रहा है। हैरानी की बात यह है कि जहां एक ओर निर्माण कार्यों के लिए बालू की मांग लगातार बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर सरकार के खजाने में एक भी रुपया नहीं पहुंच रहा।
रांची में ही प्रतिदिन करीब 500 हाइवा बालू की हो रही खपत: Jharkhand News
जानकारी के मुताबिक, सिर्फ रांची में ही प्रतिदिन करीब 500 हाइवा बालू की खपत हो रही है। एक हाइवा में औसतन 40 टन बालू के हिसाब से यह आंकड़ा रोजाना लगभग 20 हजार टन तक पहुंच जाता है। अगर पूरे राज्य की बात करें तो प्रतिदिन ढाई से तीन लाख टन बालू की खपत हो रही है। इतनी बड़ी मात्रा में खपत के बावजूद सरकार को राजस्व के रूप में कुछ भी प्राप्त नहीं हो रहा है। यह स्थिति कोई नई नहीं, बल्कि पिछले करीब आठ महीनों से लगातार बनी हुई है।
अनियंत्रित खनन से पर्यावरण पर भी गंभीर असर: Jharkhand News
दरअसल, पहले राज्य में बालू घाटों का संचालन झारखंड राज्य खनिज विकास निगम (JSMDC) के जिम्मे था। लेकिन निगम से यह जिम्मेदारी वापस लेने के बाद अब तक नई टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। नतीजतन, किसी भी अधिकृत एजेंसी को घाट संचालन की जिम्मेदारी नहीं मिली है।
इस प्रशासनिक ढिलाई का सीधा फायदा अवैध खनन माफिया उठा रहे हैं। बिना किसी रोक-टोक के बालू का उठाव जारी है, जिससे सरकार को भारी राजस्व नुकसान हो रहा है। साथ ही, अनियंत्रित खनन से पर्यावरण पर भी गंभीर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। अगर जल्द ही टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं की गई, तो यह समस्या और भी गंभीर रूप ले सकती है।



