Jharkhand News: झारखंड विधानसभा बजट सत्र, विश्वविद्यालय विधेयक पारित, JTET और पानी संकट पर सत्ता-विपक्ष आमने-सामने

Jharkhand News: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के 16वें दिन की कार्यवाही के दौरान कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। सदन की दूसरी पाली में झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक पारित कर दिया गया। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने इस विधेयक का प्रस्ताव सदन पटल पर रखा, जिसे सदन ने स्वीकृति प्रदान कर दी।

राज्य में 69,916 चापाकल खराब: Jharkhand News

इससे पहले पहली पाली की कार्यवाही के दौरान राज्य में खराब पड़े चापाकलों का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। विधायक हेमलाल मुर्मू ने संतालपरगना, विशेषकर लिट्टीपाड़ा क्षेत्र में पेयजल संकट का मुद्दा उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि इलाके में जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है, जिससे बड़ी संख्या में चापाकल बेकार हो चुके हैं। ऐसे में सूखा प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को पेयजल कैसे मिलेगा, यह गंभीर सवाल है। उन्होंने सरकार से इस समस्या के समाधान के लिए ठोस योजना पेश करने की मांग की।

मामले पर जवाब देते हुए मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने स्वीकार किया कि जलस्तर गिरने के कारण राज्य में पेयजल संकट की स्थिति उत्पन्न हुई है। उन्होंने बताया कि झारखंड में कुल 69,916 चापाकल खराब पड़े हैं, जिनमें से पाकुड़ जिले में 3,446 चापाकल खराब हैं। मंत्री ने कहा कि 44,906 चापाकलों की सामान्य मरम्मत के लिए स्वीकृति दे दी गई है और इस पर काम चल रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार जल्द से जल्द समस्या के समाधान का प्रयास कर रही है।

पानी संकट पर विपक्ष का हमला: Jharkhand News

सरकार के जवाब से असंतुष्ट नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राज्य की स्थिति इतनी खराब हो गई है कि चापाकलों की मरम्मत के लिए भी केंद्र पर निर्भरता बढ़ रही है। मरांडी ने इसे सरकार की विफलता बताते हुए कहा कि जहां वैश्विक स्तर पर पेट्रोल और गैस को लेकर संकट है, वहीं झारखंड में लोग पानी जैसी बुनियादी जरूरत के लिए जूझ रहे हैं। हालांकि मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि मरम्मत के लिए केंद्र से पैसे मांगने की बात गलत है और राज्य सरकार ने स्वयं फंड जारी किया है।

असंसदीय भाषा पर भी हुआ विवाद: Jharkhand News

सदन की कार्यवाही के दौरान असंसदीय भाषा के इस्तेमाल को लेकर भी माहौल गरमा गया। विधायक नीरा यादव ने आरोप लगाया कि सदन में बार-बार आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल हो रहा है और उन्होंने विशेष रूप से विधायक समीर मोहंती का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही को छात्राएं भी देखती हैं, इसलिए इस तरह की भाषा गलत संदेश देती है। विवाद बढ़ने पर स्पीकर ने हस्तक्षेप करते हुए आपत्तिजनक शब्दों को कार्यवाही से हटाने का निर्देश दिया। मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने विपक्ष की भावना को उचित बताया, वहीं संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने खेद जताते हुए माफी मांगी और कहा कि सदन की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

JTET अभ्यर्थियों पर लाठीचार्ज का मुद्दा गरमाया

सदन में JTET अभ्यर्थियों पर हुए लाठीचार्ज का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठा। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड पात्रता परीक्षा की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज किया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और यह सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जब सरकार समय पर परीक्षाएं आयोजित नहीं करेगी तो युवा सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे। मरांडी ने यह भी सवाल उठाया कि आखिर कब तक सरकार पिछली सरकारों को दोष देती रहेगी, जबकि पिछले छह वर्षों से राज्य में यही सरकार है।

वहीं सरकार की ओर से जवाब देते हुए मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि JTET परीक्षा के संबंध में हाईकोर्ट ने 31 मार्च तक का समय दिया है और सरकार न्यायालय के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई कर रही है। उन्होंने कहा कि पहले सिस्टम में खामियां थीं, लेकिन अब उसे सुधारने की दिशा में काम किया जा रहा है और परीक्षाएं समय पर आयोजित कराई जाएंगी। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है और किसी भी अव्यवस्था से निपटने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई।

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