बोकारो | झारखंड के कैबिनेट मंत्री Dr. Irfan Ansari मंगलवार को चास नगर निगम चुनाव के प्रचार में पहुंचे, जहाँ उन्होंने एक बड़ा राजनीतिक बयान देकर सियासी हलचल तेज कर दी है।
“वतु इज़्ज़ु मन तशा, वतु ज़िल्लु मन तशा” (अल्लाह जिसे चाहे इज़्ज़त दे और जिसे चाहे ज़िल्लत दे)
यह जनसैलाब देखकर निश्चित तौर पर मेरे हौसले और मजबूत होते हैं। मैं मानता हूँ कि इज़्ज़त और सम्मान इंसान की सच्चाई, ईमानदारी और वफादारी से मिलते हैं — और सबसे ऊपर, उसे ऊपर वाला देखता है।… pic.twitter.com/tSEJorfT3b— Dr. Irfan Ansari (@IrfanAnsariMLA) February 17, 2026
कांग्रेस समर्थित मेयर प्रत्याशी जमील अख्तर के पक्ष में गौस नगर (भर्रा) में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मंत्री ने जनसंख्या के आधार पर हिस्सेदारी की मांग उठाई।
आदिवासी बड़ा भाई, तो अल्पसंख्यक छोटा भाई: Irfan Ansari
मंत्री इरफान अंसारी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए अल्पसंख्यक समुदाय के प्रतिनिधित्व पर सवाल खड़े किए:
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हिस्सेदारी की मांग: उन्होंने कहा, “झारखंड में आदिवासी 27 प्रतिशत हैं और हम अल्पसंख्यक 19 प्रतिशत। हम सिर्फ वोट देने के लिए नहीं बने हैं। अगर हमें संसद या विधानसभा में पर्याप्त जगह नहीं मिलती, तो कम से कम मेयर पद पर तो हमारा हक बनता है।”
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भाईचारे की अपील: उन्होंने आदिवासी समाज से समर्थन मांगते हुए कहा कि आप बड़े भाई हैं, तो हमें छोटा भाई मानकर हमारा अधिकार दीजिए।
जमील अख्तर की जीत से होगा चास का विकास: Irfan Ansari
प्रत्याशी जमील अख्तर को एक ‘साफ-सुथरी छवि’ वाला नेता बताते हुए मंत्री ने चास की जनता से वादा किया:
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सरकार का साथ: झारखंड में कांग्रेस समर्थित गठबंधन की सरकार है। यदि चास में कांग्रेस समर्थित मेयर चुना जाता है, तो विकास योजनाओं के लिए फंड और तालमेल में आसानी होगी।
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दलगत राजनीति से ऊपर: उन्होंने जनता से अपील की कि वे पार्टी और दलगत भावनाओं से ऊपर उठकर क्षेत्र के चहुमुखी विकास के लिए जमील अख्तर को वोट दें।
राहुल गांधी और 2029 का लक्ष्य
राष्ट्रीय राजनीति पर टिप्पणी करते हुए डॉ. अंसारी ने भाजपा पर तीखा हमला बोला:
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सदन में आवाज: उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा राहुल गांधी से डर गई है, इसलिए उन्हें सदन में बोलने नहीं दिया जाता।
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प्रधानमंत्री का चेहरा: उन्होंने दावा किया कि आने वाले 2029 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी ही भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे।
मंत्री इरफान अंसारी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में नगर निकाय चुनाव गैर-दलीय आधार पर हो रहे हैं, लेकिन राजनीतिक दल पर्दे के पीछे से अपने समर्थित उम्मीदवारों के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। जनसंख्या के आधार पर हिस्सेदारी का यह मुद्दा आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है।
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