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झारखंड कांग्रेस में ‘जंबो कमेटी’ पर बवाल: एक पद-एक व्यक्ति नियम टूटा?

कांग्रेस में अंदरूनी संकट: कमेटी गठन के बाद फूटा असंतोष

झारखंड कांग्रेस का ‘पोस्टमार्टम’: जंबो कमेटी में नियम ताक पर, नेतृत्व पर उठे बड़े सवाल

झारखंड कांग्रेस के अंदरूनी हालात एक बार फिर चर्चा में हैं। नई प्रदेश कमेटी के गठन के बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ रहा है। “एक व्यक्ति, एक पद” के सिद्धांत का दावा करने वाली कांग्रेस पर अब अपने ही नियमों को तोड़ने के आरोप लग रहे हैं। 81 सीटों वाले राज्य में 350 सदस्यीय कमेटी ने संगठन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


जंबो कमेटी पर उठे सवाल

  • झारखंड में कांग्रेस के पास सिर्फ 16 विधायक हैं, फिर भी 350 सदस्यीय कमेटी
  • इतने बड़े ढांचे की उपयोगिता पर सवाल
  • “सबको खुश करने” की कोशिश ने संगठन को उलझाया

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इतनी बड़ी कमेटी निर्णय प्रक्रिया को कमजोर कर सकती है।


‘एक व्यक्ति, एक पद’ का फॉर्मूला हुआ फेल?

कांग्रेस के अंदर से ही आरोप उठ रहे हैं कि इस बार—

  • कई नेताओं को एक से ज्यादा जिम्मेदारियां दी गईं
  • केंद्रीय स्तर के पदाधिकारियों को भी प्रदेश कमेटी में अहम भूमिका
  • विधायक और संगठन पद एक साथ

उदाहरण के तौर पर—

  • गुंजन सिंह (राष्ट्रीय महिला कांग्रेस महासचिव) को प्रदेश उपाध्यक्ष
  • राजेश कच्छप (विधायक) को उपाध्यक्ष
  • जयमंगल सिंह (विधायक व मुख्य सचेतक) को भी उपाध्यक्ष
  • सुरेश बैठा (विधायक) को उपाध्यक्ष
  • मंजूर अंसारी (अल्पसंख्यक मोर्चा अध्यक्ष) को भी उपाध्यक्ष

यह नियुक्तियां पार्टी की गाइडलाइन के खिलाफ मानी जा रही हैं।


योग्यता बनाम संतुलन की राजनीति

  • कई अनुभवी और जमीनी नेताओं को अपेक्षाकृत कम जिम्मेदारी
  • वहीं कम जनाधार वाले नेताओं को बड़े पद
  • एससी समुदाय में सीमित चेहरों पर बार-बार भरोसा

इससे संगठन में असंतुलन और नाराजगी बढ़ने की बात कही जा रही है।


पुरानी कमेटी से तुलना

कांग्रेस के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं का कहना है कि—

  • पिछली कमेटी में नियमों का सख्ती से पालन हुआ था
  • विधायक, सांसद और बड़े पदाधिकारी शामिल नहीं थे
  • संगठन ज्यादा संतुलित और प्रभावी था

इस बार नियमों में ढील ने संगठनात्मक अनुशासन को कमजोर किया है।


अंदरूनी असंतोष के संकेत

कमेटी गठन के बाद से ही—

  • इस्तीफों की खबरें सामने आईं
  • नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल
  • गुटबाजी और खींचतान की चर्चा

यह संकेत देते हैं कि पार्टी के भीतर ‘सब ठीक नहीं’ है।


निष्कर्ष

झारखंड कांग्रेस की नई कमेटी ने संगठनात्मक मजबूती के बजाय नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
अगर पार्टी ने समय रहते संरचना और नेतृत्व शैली पर पुनर्विचार नहीं किया, तो इसका असर आने वाले चुनावों में दिख सकता है।

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