
राँची | Aditya Sahu: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के समापन के बाद राज्य की सियासत में ‘सनातन’ और ‘तुष्टीकरण’ के मुद्दे पर घमासान छिड़ गया है।
झारखंड के माननीय राज्यपाल श्री @santoshgangwar जी से आज आत्मीय भेंट की। pic.twitter.com/byJe9UKkVK
— Aditya Sahu (@AdityaPdSahu) March 19, 2026
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और सांसद आदित्य साहू ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर हिंदू देवी-देवताओं और पूजा पद्धतियों के अपमान का गंभीर आरोप लगाते हुए कड़ा प्रहार किया है। साहू ने मुख्यमंत्री की तुलना कांग्रेस नेता राहुल गांधी से करते हुए कहा कि वे वोट बैंक की राजनीति के लिए अपनी मर्यादाएं लांघ रहे हैं।
राहुल गांधी की राह पर मुख्यमंत्री: Aditya Sahu
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल आजादी के बाद से ही सनातन संस्कृति को निशाना बना रहे हैं।
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तुष्टीकरण का आरोप: साहू ने कहा, “जवाहर लाल नेहरू से लेकर राहुल गांधी तक ने हमेशा सनातन को गाली दी है। अब दुर्भाग्यपूर्ण है कि हेमंत सोरेन भी उसी रास्ते पर चल पड़े हैं।”
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विधानसभा में उपहास: साहू ने दावा किया कि बजट सत्र के अंतिम दिन मुख्यमंत्री ने हिंदू देवी-देवताओं और यज्ञ-हवन जैसी पवित्र परंपराओं का मजाक उड़ाया, जो एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को शोभा नहीं देता।
दोहरा चरित्र और हिंदू विरोधी मानसिकता: Aditya Sahu
आदित्य साहू ने मुख्यमंत्री के व्यक्तिगत आचरण और उनके राजनीतिक बयानों के बीच विरोधाभास की ओर इशारा किया।
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दोहरा मापदंड: “मुख्यमंत्री स्वयं सपरिवार पूजा-पाठ करते हैं, लेकिन सदन में आकर उसी परंपरा का मखौल उड़ाते हैं। यह उनकी सत्ता लोलुपता और दोहरे चरित्र को उजागर करता है।”
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पुराने फैसलों का हवाला: भाजपा अध्यक्ष ने याद दिलाया कि मूर्ति का आकार छोटा करने, रामनवमी के झंडे पर पाबंदी और डीजे नहीं बजाने जैसे आदेशों से सरकार ने पहले ही अपनी मानसिकता साफ कर दी थी।
मुख्यमंत्री से क्षमा याचना की मांग
साहू ने मुख्यमंत्री को चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनमें हिम्मत है, तो वे अन्य धर्मों की मान्यताओं का भी इसी तरह मजाक उड़ाकर देखें। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा:
“हिंदू समाज सहिष्णु है, लेकिन जब उसे ललकारा जाता है, तो महिषासुर मर्दन के लिए दुर्गा और काली का अवतार होता है। मुख्यमंत्री अपने बयानों पर हिंदू समाज से तुरंत क्षमा मांगें, अन्यथा उन्हें जनता का कड़ा प्रतिकार झेलना होगा।”
भाजपा के इस कड़े रुख से साफ है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा झारखंड की राजनीति में और गरमाएगा। भाजपा इसे ‘सांस्कृतिक गौरव’ बनाम ‘तुष्टीकरण’ की लड़ाई के रूप में पेश कर रही है, जबकि सत्ता पक्ष की ओर से अभी इस पर विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है।



