रांची। झारखंड की राजनीति में अपनी बेबाकी के लिए जानी जाने वाली पूर्व विधायक Amba Prasad ने राज्य की कानून व्यवस्था और पुलिसिंग प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आश्चर्य जताया है कि केंद्र सरकार द्वारा नए कानून लागू किए जाने के डेढ़ साल बाद भी झारखंड के पुलिस थानों में पुरानी धाराओं के तहत ही प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जा रही है। अंबा प्रसाद ने इस तकनीकी और कानूनी चूक को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से तत्काल संज्ञान लेने की अपील की है।
BNSS की जगह अब भी CrPC का इस्तेमाल
पूर्व विधायक ने सोशल मीडिया और प्रेस के माध्यम से बताया कि राज्य के थानों में आए दिन हजारों प्राथमिकी दर्ज हो रही हैं, लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि उन पर अब भी सीआरपीसी की धारा 154 अंकित की जा रही है। उन्होंने कहा, “भारत में 1 जुलाई 2024 से दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) के स्थान पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) प्रभावी हो चुकी है। इस ऐतिहासिक बदलाव को काफी समय बीत चुका है, फिर भी झारखंड पुलिस पुराने ढर्रे पर काम कर रही है।”
ऑनलाइन सिस्टम और NCRB फॉर्म पर सवाल
अंबा प्रसाद ने विशेष रूप से एनसीआरबी (NCRB) के फॉर्म पर होने वाली ऑनलाइन प्रविष्टियों की ओर ध्यान खींचा। उन्होंने कहा कि पुलिस थानों में जो ऑनलाइन प्राथमिकी दर्ज की जा रही है, उसमें अभी भी सॉफ्टवेयर या फॉर्म के स्तर पर सुधार नहीं हुआ है। कल और परसों की तारीखों में दर्ज एफआईआर में भी पुराने कानून का उल्लेख होना यह दर्शाता है कि सिस्टम अपडेट नहीं है।
मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग
अंबा प्रसाद ने चेतावनी देते हुए कहा कि पुराने कानून के तहत एफआईआर दर्ज होने से भविष्य में कानूनी पेचीदगियां पैदा हो सकती हैं और मुकदमों के ट्रायल पर इसका असर पड़ सकता है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मांग की है कि गृह विभाग को इस संबंध में सख्त निर्देश दिए जाएं ताकि राज्य की पूरी पुलिसिंग प्रणाली नए कानूनों के अनुरूप अपडेट हो सके।



