पटना। बिहार में विशेष सघन मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) को लेकर Election Commission ने बड़ी कार्रवाई की तैयारी कर ली है। सर्वोच्च न्यायालय (SC) के आदेश के बाद अब राज्य के 12 प्रमुख राजनीतिक दलों को नोटिस भेजे जाएंगे।
आयोग की यह प्रक्रिया रविवार से शुरू होगी। इस कदम को चुनावी पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय करने के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची की शुद्धता पर दलों की प्रत्यक्ष जिम्मेदारी तय की
सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में साफ कहा है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, सुधार करने और प्रारूप मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने में राजनीतिक दलों की प्रत्यक्ष जिम्मेदारी तय होगी। कोर्ट का मानना है कि लोकतंत्र की जड़ें मजबूत करने के लिए मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता सबसे जरूरी है। यदि सूची में त्रुटि या लापरवाही होती है, तो उसका सीधा असर चुनावी प्रक्रिया और मतदाता अधिकारों पर पड़ता है।
Election Commission ने 12 राजनीतिक दलों को नोटिस भेजने की प्रक्रिया शुरू की
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को गंभीरता से लेते हुए संबंधित 12 राजनीतिक दलों को नोटिस जारी करने की तैयारी कर ली है। इन दलों से पूछा जाएगा कि मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया में उन्होंने किस स्तर पर योगदान दिया और अपने प्रतिनिधियों को बूथ स्तर पर कितनी सक्रियता से तैनात किया। आयोग ने संकेत दिया है कि भविष्य में लापरवाही करने वाले दलों पर और भी सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
Election Commission News: राजनीतिक दलों की सक्रियता और जिम्मेदारी पर खड़े हो रहे सवाल
अक्सर यह देखने में आता है कि राजनीतिक दल चुनाव के दौरान मतदाता सूची में गड़बड़ियों का मुद्दा उठाते हैं, लेकिन सूची के पुनरीक्षण और सुधार की प्रक्रिया में उनकी सक्रियता कम रहती है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश इसीलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे दलों की भूमिका स्पष्ट होगी। अब उन्हें केवल आरोप लगाने या शिकायत करने के बजाय अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
Election Commission News: मतदाता सूची की पारदर्शिता से आम जनता को होगा बड़ा लाभ
यदि राजनीतिक दल समय रहते मतदाता सूची में त्रुटियों की पहचान कर सही कराने में सक्रिय भूमिका निभाते हैं, तो इससे आम मतदाताओं को सीधा लाभ मिलेगा। जिन लोगों के नाम अब तक सूची से गायब रह जाते थे या गलत छपते थे, उनके अधिकार सुरक्षित रहेंगे। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए एक बड़ा सुधार साबित होगा।
नोटिस के जवाब और भविष्य की प्रक्रिया से तय होगी आगे की राह
नोटिस जारी होने के बाद सभी 12 राजनीतिक दलों से चुनाव आयोग को लिखित जवाब देना होगा। इसके बाद आयोग उनकी रिपोर्ट सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष भी प्रस्तुत कर सकता है। जानकारों का कहना है कि यह प्रक्रिया राजनीतिक दलों को जिम्मेदार बनाने और मतदाता सूची की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम है।
बिहार में SIR को लेकर चुनाव आयोग का यह कदम लोकतंत्र की मजबूती और मतदाता अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही यह प्रक्रिया आने वाले समय में पूरे देश के लिए एक नजीर बन सकती है।
