केंद्र के सामने झारखंड की मांग, मनरेगा का बकाया जल्द जारी करें: दीपिका पांडेय सिंह

मनरेगा पर VC में झारखंड की जोरदार पैरवी, बकाया भुगतान और मजदूरी बढ़ाने की मांग

मनरेगा पर VC में झारखंड की आवाज बुलंद, बकाया भुगतान और मजदूरी बढ़ाने की मांग

रांची: ‘विकसित भारत-जी ग्राम जी योजना’ और Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act (मनरेगा) को लेकर शनिवार शाम अहम वर्चुअल बैठक (VC) आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने की, जिसमें देशभर के राज्यों के ग्रामीण विकास मंत्रियों ने हिस्सा लिया।

झारखंड की ओर से ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री Deepika Pandey Singh ने राज्य का पक्ष मजबूती से रखा और कई अहम मुद्दे उठाए।

बकाया भुगतान का मुद्दा प्रमुख

मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने बैठक में झारखंड के बकाया भुगतान का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बताया कि राज्य में—

का भुगतान लंबित है। उन्होंने केंद्र से जल्द से जल्द यह राशि जारी करने की मांग की। उनका कहना था कि लंबे समय से भुगतान नहीं होने के कारण मनरेगा मजदूरों में निराशा बढ़ रही है।

मजदूरी बढ़ाने की मांग

मंत्री ने मनरेगा मजदूरी दर बढ़ाने की भी जोरदार पैरवी की। उन्होंने कहा कि मौजूदा मजदूरी दर बढ़ती महंगाई के हिसाब से पर्याप्त नहीं है और इसे बढ़ाना समय की जरूरत है। इस मांग पर कई राज्यों की सहमति भी बताई गई।

40% हिस्सेदारी पर आपत्ति

‘विकसित भारत-जी ग्राम जी योजना’ में राज्यों की 40% हिस्सेदारी तय किए जाने पर झारखंड ने कड़ा विरोध जताया। मंत्री ने कहा कि यह फैसला झारखंड जैसे राज्यों के लिए वित्तीय बोझ बढ़ाने वाला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इससे राज्य का आर्थिक संकट और गहरा सकता है।

100 से 150 दिन रोजगार की मांग

दीपिका पांडेय सिंह ने मनरेगा के तहत 100 दिन की जगह 150 दिन काम की गारंटी देने की मांग भी उठाई। साथ ही 60 दिनों के कार्य अवकाश नियम में छूट देने की बात कही, ताकि मजदूरों को रोजगार की निरंतरता मिल सके और पलायन पर रोक लगे।

मनरेगा जारी रखने पर जोर

उन्होंने कहा कि झारखंड विधानसभा पहले ही मनरेगा को जारी रखने के पक्ष में प्रस्ताव पारित कर चुकी है। ऐसे में केंद्र को राज्यों की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए योजना में बदलाव करना चाहिए।

कुल मिलाकर, इस बैठक में झारखंड ने साफ संकेत दिया कि वह मनरेगा को कमजोर करने के बजाय और मजबूत करने के पक्ष में है, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और मजदूरों को सहारा मिल सके।

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