“महिला आरक्षण पर केंद्र की नीयत पर सवाल, सत्ता साधने का आरोप: दीपिका पांडेय सिंह”
पटना | 21 अप्रैल 2026
महिला आरक्षण के मुद्दे पर सियासत लगातार गरमाती जा रही है। पटना स्थित बिहार प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में झारखंड की ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम भी मौजूद रहे।
“महिला आरक्षण के नाम पर राजनीति”
दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को जिस तरह विशेष सत्र बुलाकर लाया गया, उससे यह साफ होता है कि इसका उद्देश्य महिलाओं को तुरंत अधिकार देना नहीं, बल्कि राजनीतिक समीकरण साधना है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक इस अधिनियम को लागू नहीं किया गया, जबकि उसमें संशोधन की बात हो रही है।
“जनगणना और परिसीमन के नाम पर देरी”
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने जनगणना, जातिगत जनगणना और परिसीमन जैसी शर्तें जोड़कर इस प्रक्रिया को टालने का काम किया है। खासतौर पर ओबीसी प्रतिनिधित्व के मुद्दे को नजरअंदाज करने की कोशिश की जा रही है।
“विपक्ष ने दिया था समर्थन”
दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि 2023 में इस विधेयक को कांग्रेस सहित पूरे विपक्ष ने समर्थन दिया था, लेकिन उनकी मांग थी कि इसे तत्काल लागू किया जाए, ताकि संसद में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
“सत्ता में बने रहने की रणनीति”
उन्होंने आरोप लगाया कि परिसीमन के जरिए भविष्य की राजनीति को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। इससे यह स्पष्ट होता है कि महिला सशक्तिकरण के बजाय सत्ता में बने रहने की रणनीति अपनाई जा रही है।
“कांग्रेस हमेशा रही समर्थक”
उन्होंने कहा कि कांग्रेस का इतिहास महिला सशक्तिकरण के पक्ष में रहा है। राजीव गांधी के नेतृत्व में 73वें और 74वें संविधान संशोधन के जरिए पंचायती राज और नगर निकायों में महिलाओं को 33% आरक्षण दिया गया, जिससे उनकी भागीदारी बढ़ी।
निष्कर्ष
दीपिका पांडेय सिंह ने साफ कहा कि महिलाओं को सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि वास्तविक अधिकार चाहिए। उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस इस मुद्दे पर मजबूती से खड़ी है और महिलाओं के अधिकार और सम्मान के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगी।
