
JCERT पर कविता के कॉपीराइट उल्लंघन का आरोप, लेखक अभिरंजन कुमार ने दी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
रांची: झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (JCERT) की कक्षा 5 की हिंदी पाठ्य पुस्तक में प्रकाशित कविता को लेकर विवाद सामने आया है। लेखक और पत्रकार अभिरंजन कुमार ने आरोप लगाया है कि उनकी चर्चित बाल कविता ‘बन गया खाना’ को बिना अनुमति और बिना लेखक का नाम दिए पाठ्य पुस्तक में शामिल किया गया है।
‘बन गया खाना’ कविता को लेकर विवाद
लेखक अभिरंजन कुमार के अनुसार, उनकी कविता ‘बन गया खाना’ को JCERT की कक्षा 5 की हिंदी पाठ्य पुस्तक ‘भाषांजलि’ में शामिल किया गया है। उनका आरोप है कि कविता को प्रकाशित करने से पहले उनसे औपचारिक अनुमति नहीं ली गई और न ही उन्हें इसके लिए किसी प्रकार की रॉयल्टी दी गई।
लेखक का यह भी दावा है कि पाठ्य पुस्तक में कविता के साथ उनका नाम या लेखक के रूप में क्रेडिट नहीं दिया गया है। उन्होंने इसे अपने रचनात्मक और कॉपीराइट अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला बताया है।
‘बचपन की पचपन कविताएं’ में शामिल है रचना
अभिरंजन कुमार ने बताया कि ‘बन गया खाना’ उनकी बाल कविता संग्रह ‘बचपन की पचपन कविताएं’ में भी शामिल है। उनके मुताबिक, यह कविता अन्य प्रकाशनों में भी प्रकाशित हो चुकी है और देश के कई निजी विद्यालयों में इस्तेमाल की जाने वाली हिंदी पाठ्य पुस्तकों में भी पढ़ाई जाती है।
लेखक के अनुसार, कविता ‘बच्चों के सर्वश्रेष्ठ गीत’ नामक संग्रह में भी प्रकाशित हुई है। उनका दावा है कि करीब 27 वर्ष पहले यह रचना एक राष्ट्रीय अखबार में भी प्रकाशित हो चुकी है।
YouTube वीडियो से मिली जानकारी
अभिरंजन कुमार ने बताया कि उन्हें JCERT की पाठ्य पुस्तक में कविता के इस्तेमाल की जानकारी सीधे संस्था की ओर से नहीं मिली। उनके मुताबिक, झारखंड के विभिन्न स्कूलों के शिक्षक और बच्चे इस कविता पर कार्यक्रम प्रस्तुत कर उसके वीडियो YouTube पर अपलोड कर रहे थे।
इंटरनेट पर ऐसे ही वीडियो देखने के दौरान उनकी नजर कविता पर पड़ी और इसके बाद उन्हें पता चला कि उनकी रचना लंबे समय से पाठ्य पुस्तक में प्रकाशित हो रही है।
लेखक ने दी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
अभिरंजन कुमार ने कहा है कि यदि JCERT की ओर से इस मामले में जल्द सुधार नहीं किया गया और उनके सम्मान तथा अधिकारों के कथित उल्लंघन की भरपाई नहीं की गई, तो वह कानूनी कार्रवाई पर विचार करेंगे।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी कानूनी कदम के दौरान उनकी कोशिश रहेगी कि झारखंड के विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
JCERT के पक्ष का इंतजार
फिलहाल इस मामले में JCERT की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने की जानकारी नहीं है। ऐसे में कविता को पाठ्य पुस्तक में शामिल करने की अनुमति, लेखक को क्रेडिट और रॉयल्टी से जुड़े सवालों पर परिषद का पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।



