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“डायन प्रथा पर सख्ती जरूरी: रांची कोलोकीयम में उठी आवाज”

महिलाओं के खिलाफ अपराध पर चिंता, पुनर्वास पर जोर”

“डायन प्रथा पर सख्ती और पीड़ितों के पुनर्वास पर जोर, रांची में राष्ट्रीय स्तर का कोलोकीयम”

 

रांची | 25 अप्रैल 2026

 

झारखंड में महिलाओं के खिलाफ अपराध, खासकर डायन प्रथा (विच हंटिंग) जैसी गंभीर सामाजिक समस्या को लेकर शनिवार को रांची स्थित झारखंड न्यायिक अकादमी में एक महत्वपूर्ण कोलोकीयम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में अपराध पीड़ितों को राहत और पुनर्वास देने में विधिक सेवा संस्थाओं की भूमिका पर गहन चर्चा हुई।

 

सुप्रीम कोर्ट के जज ने जताई चिंता

 

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराध केवल कानून का विषय नहीं, बल्कि समाज की गहरी संरचनात्मक समस्या है। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 महिलाओं को समानता और गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार देते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इनका पूरी तरह पालन नहीं हो रहा है।

 

उन्होंने झारखंड में प्रचलित डायन प्रथा को अमानवीय और लैंगिक हिंसा का गंभीर रूप बताते हुए कहा कि इसे खत्म करने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और मजबूत कानून-व्यवस्था की जरूरत है।

 

“कानून नहीं, क्रियान्वयन सबसे बड़ी चुनौती”

 

विशिष्ट अतिथि न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराध रोकने में सबसे बड़ी चुनौती कानून की नहीं, बल्कि उसके प्रभावी क्रियान्वयन की है। उन्होंने कहा कि अगर गाइडलाइंस और कानूनों का सही तरीके से पालन हो, तो ऐसे मामलों में काफी कमी लाई जा सकती है।

 

पीड़ितों के पुनर्वास पर फोकस

 

कोलोकीयम में इस बात पर भी जोर दिया गया कि न्याय केवल अपराधियों को सजा देने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि पीड़ितों के पुनर्वास को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए। विधिक सेवा संस्थाओं को गांव-गांव तक पहुंच बनाकर पीड़ितों को कानूनी सहायता और मुआवजा दिलाने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

 

कई गणमान्य लोग रहे मौजूद

 

कार्यक्रम में झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति महेश शरदचंद्र सोनक, न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद सहित कई न्यायिक अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल हुए। साथ ही विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों की महिलाएं और पीड़ित परिवार भी कार्यक्रम का हिस्सा बने।

 

निष्कर्ष

 

यह कोलोकीयम झारखंड में डायन प्रथा जैसी कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने और पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। अब जरूरत है कि इन चर्चाओं को जमीनी स्तर पर लागू कर वास्तविक बदलाव लाया जाए।

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