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120 सवाल मैच होने का दावा, नेपाल में 28 अभ्यर्थियों को उत्तर रटाने की कहानी सामने आई

JSSC-CGL विवाद में बड़ा खुलासा? 28 अभ्यर्थियों को नेपाल ले जाकर 135 सवाल रटाने का दावा, 120 प्रश्न हुए मैच

JSSC-CGL विवाद में बड़ा खुलासा? 28 अभ्यर्थियों को नेपाल ले जाकर 135 सवाल रटाने का दावा, 120 प्रश्न हुए मैच

Ranchi: झारखंड कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल (CGL) परीक्षा में कथित धांधली और पेपर लीक की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की जांच में कई अहम तथ्य सामने आने का दावा किया जा रहा है। जांच में मनी ट्रेल और आरोपियों के बयानों के आधार पर पेपर लीक के आरोपों की पड़ताल की जा रही है।

जांच से जुड़े दावों के मुताबिक, मुख्य प्रश्न पत्र की फिजिकल कॉपी अब तक बरामद नहीं हुई है। हालांकि, जांच में सामने आए अन्य साक्ष्यों और कथित तौर पर मैच हुए प्रश्नों को पेपर लीक की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।

नेपाल के बीरगंज ले जाए गए थे 28 अभ्यर्थी

जांच के मुताबिक, पेपर लीक के कथित नेटवर्क में मिथिलेश सिंह गिरोह की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। आरोप है कि गिरोह ने अभ्यर्थियों तक पहुंच बनाने के लिए एजेंटों की मदद ली और इसके लिए कमीशन का भुगतान किया गया।

जांच में यह भी दावा किया गया है कि कुछ अभ्यर्थियों के साथ करीब 20-20 लाख रुपये में सौदा तय किया गया था।

तत्कालीन DGP अनुराग गुप्ता के कार्यकाल के दौरान हुई जांच से जुड़े तथ्यों के मुताबिक, 28 अभ्यर्थियों को बस और अन्य वाहनों से नेपाल के बीरगंज ले जाया गया था। वहां उन्हें एक होटल में ठहराए जाने की बात सामने आई।

135 सवालों के उत्तर रटाने का दावा

जांच के अनुसार, संदीप त्रिपाठी नाम का व्यक्ति कथित तौर पर प्रश्नों के उत्तर लेकर नेपाल के होटल पहुंचा था। वहां 28 अभ्यर्थियों को 135 प्रश्नों के उत्तर याद कराने का दावा किया गया है।

जांच में सबसे महत्वपूर्ण दावा यह है कि इन रटाए गए प्रश्नों में से 120 प्रश्न और उनके उत्तर मूल परीक्षा प्रश्न पत्र से हूबहू मैच हुए।

यही तथ्य अब जांच के महत्वपूर्ण बिंदुओं में शामिल बताया जा रहा है। हालांकि, पूरे मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

नेपाल गए 28 में से 10 अभ्यर्थी सफल

जांच से सामने आए विवरण के अनुसार, नेपाल ले जाए गए 28 अभ्यर्थियों में से 10 अभ्यर्थी परीक्षा में सफल हुए थे।

इनमें विभूति अमन, दयानंद यादव, नवीन कुमार यादव, अमन कुमार सिंह, दिवाकर कुमार देव, विकास कुमार, अरविंद कुमार, उमेश यादव, उपेंद्र यादव और कृष्णा स्नेही के नाम बताए गए हैं।

इन अभ्यर्थियों की भूमिका और परीक्षा में उनकी सफलता से जुड़े तथ्यों की भी जांच की जा रही है।

तत्कालीन DGP ने पेपर लीक मानने से किया था इनकार

मामले में उस समय विवाद और बढ़ गया था जब केस डायरी में दर्ज तथ्यों के बावजूद तत्कालीन DGP अनुराग गुप्ता ने इसे सीधे पेपर लीक मानने से इनकार किया था।

उनका तर्क था कि आरोपियों के पास से प्रश्न पत्र की मूल कॉपी बरामद नहीं हुई है। इसलिए इसे सीधे तौर पर पेपर लीक कहना उचित नहीं होगा।

उन्होंने इसे छात्रों को गुमराह कर उनसे पैसे ठगने के मामले के तौर पर देखा था।

अब SIT की जांच में कथित तौर पर 120 प्रश्नों के मूल प्रश्न पत्र से मैच होने की बात सामने आने के बाद इस पुराने रुख को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

मीडिया के सामने क्या बोले थे अनुराग गुप्ता?

तत्कालीन DGP अनुराग गुप्ता ने उस समय मामले पर अपनी बात रखते हुए कहा था कि आज के दौर में एक झूठ को बार-बार बोलकर सच बनाने की कोशिश की जाती है।

उन्होंने कहा था कि CGL परीक्षा में वास्तव में गड़बड़ी हुई है या नहीं, यह जांच का विषय है। उनके मुताबिक, ‘एग्जाम फाइटर’ जैसे नाम से कई गैंग और कोचिंग से जुड़े लोग परीक्षा रद्द कराने की साजिश कर सकते हैं।

उन्होंने यह भी तर्क दिया था कि करीब 10 लाख अभ्यर्थियों में से केवल लगभग दो हजार का चयन होना है। ऐसे में बड़ी संख्या में असफल अभ्यर्थियों के कारण परीक्षा रद्द कराने की मांग का माहौल बन सकता है।

‘प्राथमिक साक्ष्य देना आरोप लगाने वालों का काम’

तत्कालीन DGP ने कहा था कि पुलिस का काम किसी दावे को डिस्प्रूव करना है, लेकिन प्राथमिक साक्ष्य उपलब्ध कराना आरोप लगाने वालों की जिम्मेदारी है।

उन्होंने ट्रेन में प्रश्न पत्र की तस्वीर खींचे जाने के दावे का जिक्र करते हुए सवाल उठाया था कि उसे भेजने वाले व्यक्ति का फोन नंबर, बैंक अकाउंट, व्हाट्सऐप चैट या पता कहां है।

अब SIT जांच पर टिकी निगाहें

JSSC-CGL मामले में SIT की जांच आगे बढ़ने के साथ पेपर लीक के कथित नेटवर्क, पैसे के लेन-देन, अभ्यर्थियों और बिचौलियों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।

मुख्य प्रश्न पत्र की फिजिकल कॉपी बरामद नहीं होने के बावजूद कथित तौर पर 120 प्रश्नों के मैच होने का दावा जांच के लिए अहम माना जा रहा है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि SIT इन साक्ष्यों को किस तरह जोड़ती है और जांच पूरी होने के बाद मामले में क्या निष्कर्ष सामने आता है। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में ही होगी।

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