नई दिल्ली: ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की हालिया घोषणा ने भारत की चिंताएं बढ़ा दी हैं। हालांकि, भारत के रणनीतिक हितों के लिए सबसे महत्वपूर्ण Chabahar Port को लेकर एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस बंदरगाह के संचालन के लिए भारत को अप्रैल 2026 तक अमेरिकी प्रतिबंधों से बिना शर्त छूट मिली हुई है।
ट्रंप की टैरिफ चेतावनी और भारत की स्थिति
12 जनवरी 2026 को राष्ट्रपति ट्रंप ने ऐलान किया था कि ईरान के साथ व्यापारिक संबंध रखने वाले देशों पर अमेरिका 25% का भारी टैरिफ लगाएगा। भारत के लिए यह खबर इसलिए चिंताजनक थी क्योंकि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है।
- राहत की खबर: विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पुष्टि की है कि चाबहार पोर्ट पर भारतीय परिचालन फिलहाल सुरक्षित है। अमेरिका ने 26 अप्रैल 2026 तक की डेडलाइन दी है, जिससे भारत का काम निर्बाध रूप से जारी रह सकेगा।
- कूटनीतिक बातचीत: भारत और अमेरिका के बीच इस मुद्दे पर उच्च स्तरीय बातचीत जारी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर अगले महीने अपने अमेरिकी समकक्ष से मुलाकात कर इस छूट को आगे बढ़ाने पर चर्चा कर सकते हैं।
भारत के लिए क्यों ‘अनिवार्य’ है चाबहार?
भारत ने 2016 से इस प्रोजेक्ट में लगभग ₹4,700 करोड़ का निवेश किया है। इसकी अहमियत के तीन मुख्य कारण हैं:
- पाकिस्तान को बाईपास करना: यह पोर्ट भारत को पाकिस्तान के जमीनी रास्ते पर निर्भर रहे बिना सीधे अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुँच प्रदान करता है।
- रणनीतिक संतुलन: यह चीन द्वारा विकसित पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट का एक प्रभावी जवाब है, जिससे भारत अरब सागर में अपनी पकड़ मजबूत करता है।
- व्यापारिक गलियारा: यह इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) का मुख्य हिस्सा है, जो भारत को रूस और यूरोप से जोड़ने का सबसे छोटा रास्ता है।
व्यापारिक चुनौतियां और भविष्य
अमेरिकी टैरिफ की खबर के बाद भारतीय बाजार में हलचल देखी गई। प्रीमियम बासमती चावल की कीमतों में गिरावट आई क्योंकि ईरान भारतीय चावल का बड़ा खरीदार है।
- आर्थिक वास्तविकता: भारत का अमेरिका को निर्यात सालाना लगभग $86 बिलियन है, जबकि ईरान के साथ व्यापार मात्र $1.6 बिलियन के करीब है। ऐसे में भारत के लिए अमेरिकी बाजार को सुरक्षित रखना प्राथमिकता है।
- उम्मीद की किरण: विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि चाबहार पोर्ट का उपयोग अफगानिस्तान में मानवीय सहायता पहुँचाने के लिए भी होता है, इसलिए अमेरिका भारत को भविष्य में भी रियायत दे सकता है।
