क्या लालू-नीतीश फिर से होंगे साथ? ममता के दूत Bihar में कौन सा संदेश लाए

Patna: Bihar की राजनीति में एक बार फिर हलचल मची है और इस बार चर्चा का केंद्र बने हैं ‘बिहारी बाबू’ शत्रुघ्न सिन्हा. उनकी हाल की मुलाकातें और बयानबाजी ने राजनीतिक गलियारों में नए समीकरणों की अटकलों को जन्म दे दिया है.

शत्रुघ्न सिन्हा ने लालू प्रसाद यादव और शिवानंद तिवारी से मुलाकात कर न सिर्फ पुराने रिश्तों को ताजा किया बल्कि बिहार की राजनीतिक सरगर्मियों को भी बढ़ा दिया.

Bihar दौरे पर हैं शत्रुघ्न सिन्हा

शत्रुघ्न सिन्हा जो अब तृणमूल कांग्रेस के सांसद हैं ने अपने दौरे को निजी बताया लेकिन उनके बयान और मुलाकातों ने इस दौरे को महज निजी दायरे तक सीमित नहीं रहने दिया. राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव से मुलाकात को भले ही उन्होंने दोस्ती की दुहाई दी हो लेकिन उनके बयानों से यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या वे बिहार में टीएमसी का राजनीतिक भविष्य तलाशने आए हैं या फिर भाजपा के खिलाफ एक नए गठबंधन की नींव रखने की कवायद हो रही है?

लालू-नीतीश की मुलाकात का क्या है संकेत

शत्रुघ्न सिन्हा ने लालू यादव से मुलाकात के बाद यह भी इशारा किया कि वह अपने अगले दौरे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी मिलने का इरादा रखते हैं. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार से उनकी अक्सर बात होती रहती है और अगली मुलाकात में वह उनके साथ कॉफी पीने का वादा भी करते हैं. यह बयान यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या वे नीतीश कुमार और लालू यादव को एक बार फिर से एक मंच पर लाने की कोशिश कर रहे हैं जैसा कि 2015 के चुनाव में हुआ था?

भाजपा पर शत्रुघ्न सिन्हा का तीखा हमला

अपने इस दौरे में शत्रुघ्न सिन्हा ने भाजपा पर जमकर हमला बोला. हिंडनबर्ग रिपोर्ट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इससे भाजपा सरकार और उसके कई नेता हिल गए हैं. उन्होंने राहुल गांधी की उस मांग का समर्थन किया कि इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट को खुद संज्ञान लेना चाहिए क्योंकि यह एक राष्ट्रीय मुद्दा है.

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पश्चिम बंगाल में एक महिला डॉक्टर के बलात्कार और हत्या के मामले में शत्रुघ्न सिन्हा ने ममता बनर्जी सरकार का बचाव करते हुए कहा कि सीबीआई कोई “होली काऊ” नहीं है जिसे हर मामले में हटा दिया जाए. उन्होंने यह भी कहा कि ममता बनर्जी ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर बंगाल पुलिस असफल होती है तो मामला सीबीआई को सौंप दिया जाएगा.

क्या Bihar की राजनीति में आएगा नया मोड़?

शत्रुघ्न सिन्हा की इस यात्रा और उनके बयानों से बिहार की राजनीति में एक नया मोड़ आने की संभावनाएं दिख रही हैं. क्या टीएमसी, राजद और जेडीयू एक नए गठबंधन की ओर बढ़ रहे हैं? क्या यह दौरा सिर्फ दोस्ती निभाने का था या इसके पीछे कोई बड़ी राजनीतिक रणनीति छिपी है? इन सवालों के जवाब तो आने वाले समय में ही मिल पाएंगे लेकिन इतना तय है कि इस दौरे ने बिहार की राजनीति को एक बार फिर से गरमा दिया है.

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