Jharkhand News: दुमका में केंदू पत्ती मजदूरों को बड़ी राहत, 2014 रुपये प्रति बोरा हुई नई दर

मजदूरों के लिए खुशखबरी: केंदू पत्ती की नई दर लागू, बढ़ेगा भुगतान

Jharkhand News: झारखंड के दुमका से वनाधारित आजीविका से जुड़े हजारों परिवारों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। संताल परगना प्रमंडल में केंदू पत्ती संग्रहकर्ताओं के लिए वर्ष 2026 की दर बढ़ाकर 2014 रुपये प्रति मानक बोरा कर दी गई है। इससे पहले यह दर 1883 रुपये थी, जो बढ़ती महंगाई के बीच मजदूरों के लिए पर्याप्त नहीं रह गई थी।

यह फैसला प्रमंडलीय आयुक्त संजय कुमार की अध्यक्षता में आयोजित केंदू पत्ती सलाहकार समिति की बैठक में लिया गया। बैठक में मौजूदा आर्थिक हालात, मजदूरी और बढ़ती लागत को ध्यान में रखते हुए दर बढ़ाने पर सहमति बनी।

पुरानी दर से बढ़ी मुश्किलें: Jharkhand News

समिति की समीक्षा में यह बात सामने आई कि पुरानी दर पर केंदू पत्ती संग्रहण करना मजदूरों के लिए मुश्किल होता जा रहा था। महंगाई, परिवहन खर्च और दैनिक जरूरतों में वृद्धि के कारण उनकी आय और खर्च के बीच संतुलन बिगड़ रहा था।

अब 2014 रुपये प्रति बोरा भुगतान: Jharkhand News

विस्तृत चर्चा के बाद सर्वसम्मति से यह तय किया गया कि वर्ष 2026 के लिए नई दर 2014 रुपये प्रति मानक बोरा होगी। यह दर सरकारी और रैयती दोनों तरह की जमीनों पर लागू होगी। इस बढ़ोतरी को मजदूरों के हित में बड़ा कदम माना जा रहा है।

हजारों परिवारों को सीधा लाभ: Jharkhand News

इस फैसले से उन हजारों परिवारों को सीधा फायदा मिलेगा, जिनकी आजीविका केंदू पत्ती पर निर्भर है। आमदनी बढ़ने से उनके जीवन स्तर में सुधार की उम्मीद है और आर्थिक स्थिरता मिलेगी।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल: Jharkhand News

संताल परगना क्षेत्र में केंदू पत्ती संग्रहण रोजगार का एक अहम जरिया है। दर बढ़ने से मजदूरों की क्रय शक्ति बढ़ेगी, जिससे स्थानीय बाजारों में भी हलचल बढ़ेगी और छोटे कारोबारियों को लाभ मिलेगा।

रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे

बेहतर भुगतान मिलने से अधिक लोग इस काम से जुड़ने के लिए प्रेरित होंगे। इससे वन आधारित रोजगार को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण इलाकों से पलायन जैसी समस्याओं को कम करने में मदद मिल सकती है।

सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा फैसला

स्थानीय स्तर पर इस निर्णय को एक दूरदर्शी और श्रमिक हितैषी कदम माना जा रहा है। यह न केवल मजदूरों को राहत देता है, बल्कि वन आधारित अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करता है। फिलहाल, 2026 के लिए लिया गया यह फैसला केंदू पत्ती संग्रहकर्ताओं के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में भी समय-समय पर दरों की समीक्षा जरूरी होगी, ताकि मजदूरों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिलता रहे।

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