परिसीमन को लेकर बंधु तिर्की की पहल, राष्ट्रपति और PM मोदी को सौंपेंगे प्रस्ताव

परिसीमन से झारखंड की आदिवासी सीटों पर क्या पड़ेगा असर? बंधु तिर्की ने तैयार किया ड्राफ्ट

झारखंड में परिसीमन को लेकर बढ़ी चिंता, आदिवासी सीटों के संरक्षण के लिए बंधु तिर्की ने तैयार किया ड्राफ्ट

Ranchi News: झारखंड में परिसीमन की संभावित प्रक्रिया को लेकर आदिवासी हितों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा चर्चा में है। पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने इस विषय पर राज्य का पक्ष राष्ट्रीय स्तर पर रखने की तैयारी की है। उन्होंने परिसीमन को लेकर एक ड्राफ्ट तैयार कराया है, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू को सौंपने की योजना है।

इस प्रस्ताव के माध्यम से झारखंड में परिसीमन की प्रक्रिया को फिलहाल स्थगित रखने और आदिवासी समुदाय के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा की मांग उठाई जाएगी।

आदिवासी हितों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की तैयारी

बंधु तिर्की की पहल का उद्देश्य परिसीमन से जुड़े मुद्दों पर राष्ट्रीय राजनीतिक नेतृत्व और सांसदों का ध्यान आकर्षित करना है। प्रस्ताव के जरिए लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों से भी अपील की जाएगी कि परिसीमन पर चर्चा के दौरान झारखंड के आदिवासी समुदाय के हितों और राज्य की सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाए।

इस संबंध में उनकी प्रमुख मांग है कि परिसीमन से जुड़ा कोई भी निर्णय झारखंड में आदिवासी समुदाय के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक अधिकारों पर प्रतिकूल असर डालने वाला नहीं होना चाहिए।

आदिवासी आरक्षित सीटों को लेकर क्यों है चिंता?

झारखंड में परिसीमन को लेकर चिंता का एक प्रमुख विषय अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित विधानसभा और लोकसभा सीटों का भविष्य है। आशंका जताई जा रही है कि परिसीमन के दौरान जनगणना के आंकड़ों और अन्य निर्धारित मानकों के आधार पर सीटों का पुनर्निर्धारण होने पर राज्य में आदिवासी राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मौजूदा स्वरूप प्रभावित हो सकता है।

हालांकि, आरक्षित सीटों की संख्या या प्रतिनिधित्व में किसी बदलाव को अभी तय तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता। इसका वास्तविक स्वरूप परिसीमन की आधिकारिक प्रक्रिया, लागू संवैधानिक प्रावधानों और संबंधित निर्णयों पर निर्भर करेगा।

पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों का दिया जाएगा हवाला

बंधु तिर्की के प्रस्ताव में संविधान की पांचवीं अनुसूची और आदिवासी समुदाय को मिले संवैधानिक संरक्षण का उल्लेख किए जाने की बात कही गई है। उनका प्रयास है कि झारखंड की विशिष्ट सामाजिक और जनजातीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर परिसीमन से संबंधित निर्णय लिए जाएं।

इस पहल के जरिए यह मांग उठाई जाएगी कि राज्य के आदिवासी समुदाय के हितों और राजनीतिक भागीदारी को पर्याप्त महत्व दिया जाए।

राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और सांसदों तक पहुंचेगा प्रस्ताव

तैयार ड्राफ्ट को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी और केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू को सौंपने की योजना है। इसके साथ ही लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों से समर्थन जुटाने का प्रयास किया जाएगा।

अब इस पहल पर आगे की कार्रवाई और राष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाली प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी। परिसीमन को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित आधिकारिक प्रक्रिया और संवैधानिक निर्णयों से ही स्पष्ट होगी।

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