जयराम महतो के समर्थन में बाबूलाल मरांडी, बोले- क्या मर्यादा का कानून सिर्फ जनप्रतिनिधियों के लिए?
जयराम महतो और बरवाअड्डा थाना प्रभारी विवाद पर बाबूलाल मरांडी ने पुलिस एसोसिएशन और सरकार पर सवाल उठाए। बोले- भाषा, शिष्टाचार और निजता के कानून सभी पर समान रूप से लागू होने चाहिए।

जयराम महतो के समर्थन में उतरे बाबूलाल मरांडी, बोले- क्या भाषा और मर्यादा का कानून सिर्फ जनप्रतिनिधियों के लिए है?
Ranchi: डुमरी विधायक जयराम महतो और बरवाअड्डा थाना प्रभारी के बीच कथित विवाद को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। अब नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने जयराम महतो के पक्ष में सवाल उठाते हुए पुलिस प्रशासन और पुलिस एसोसिएशन की भूमिका पर निशाना साधा है।
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जनप्रतिनिधि और पुलिस अधिकारी, दोनों के लिए भाषा, शिष्टाचार और मर्यादा के समान मानक होने चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि क्या भाषा और मर्यादा से जुड़े नियम सिर्फ जनप्रतिनिधियों और आम लोगों के लिए हैं?
पुलिस एसोसिएशन के रवैये पर उठाए सवाल
मरांडी ने कहा कि जनप्रतिनिधि और थाना प्रभारी के बीच कथित हॉट-टॉक के बाद पुलिस एसोसिएशन की ओर से बयान सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाषा और शिष्टाचार की मर्यादा बनाए रखना जरूरी है, लेकिन यह नियम सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए।
उन्होंने सवाल किया कि क्या पुलिस एसोसिएशन ने कभी ऐसे पुलिसकर्मियों के खिलाफ आवाज उठाई है, जो आम लोगों से कथित तौर पर गाली-गलौज या अभद्र भाषा में बात करते हैं?
मरांडी ने कहा कि पुलिसकर्मियों को भी जनता और जनप्रतिनिधियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए।
निजी बातचीत वायरल करने पर भी सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने किसी व्यक्ति की कथित निजी बातचीत को रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर वायरल किए जाने पर भी सवाल उठाया।
उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उसकी निजी बातचीत रिकॉर्ड कर सार्वजनिक करना गंभीर कानूनी और निजता से जुड़ा मुद्दा हो सकता है। मरांडी ने सवाल किया कि क्या निजता का अधिकार केवल आम नागरिकों के लिए है या पुलिस और जनप्रतिनिधि भी इसके दायरे में आते हैं?
हालांकि, किसी कथित ऑडियो की रिकॉर्डिंग, उसकी प्रामाणिकता और उसे सार्वजनिक किए जाने की परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि होना जरूरी है।
चास थाना प्रभारी के मामले का भी किया जिक्र
बाबूलाल मरांडी ने अपने बयान में बोकारो के चास थाना प्रभारी से जुड़े कथित वायरल ऑडियो का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि उस समय उन्होंने संबंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की मांग की थी।
मरांडी का आरोप है कि सरकार ने ऐसे मामलों में पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई करने के बजाय उनका बचाव किया।
‘पुलिस को गाली देने का विशेषाधिकार किसने दिया?’
मरांडी ने कहा कि यदि किसी आम नागरिक द्वारा गाली-गलौज करना गलत माना जाता है, तो पुलिस अधिकारी को भी जनता के साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने का कोई विशेष अधिकार नहीं मिल सकता।
उन्होंने कहा कि कानून और मर्यादा सभी के लिए समान होनी चाहिए। पुलिस का काम कानून लागू करना है और उसे खुद भी कानून तथा निर्धारित आचार-व्यवहार का पालन करना चाहिए।
जयराम महतो के मामले में बढ़ी सियासी हलचल
जयराम महतो के खिलाफ बरवाअड्डा थाने में दर्ज FIR के बाद से मामला लगातार राजनीतिक रंग ले रहा है। विधायक ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर कहा है कि उन्हें मुकदमा दर्ज होने से आपत्ति नहीं है, लेकिन बिना निष्पक्ष जांच के कार्रवाई किए जाने पर सवाल है।
अब बाबूलाल मरांडी के बयान के बाद इस मामले में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
नोट: बरवाअड्डा मामले में पुलिस और विधायक पक्ष की ओर से अलग-अलग दावे सामने आए हैं। किसी भी आरोप की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।



