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बाबूलाल मरांडी का दावा- 14 हजार आदिवासी मतदाताओं के नाम हटाए गए, जांच की मांग

जामताड़ा में बाबूलाल मरांडी ने दावा किया कि SIR के दौरान करीब 14 हजार आदिवासी मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए। उन्होंने मामले की जांच की मांग की।

जामताड़ा में बाबूलाल मरांडी का बड़ा दावा, बोले- 14 हजार आदिवासी मतदाताओं के नाम हटाए गए; जांच की मांग

Jamtara: झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी गुरुवार को जामताड़ा पहुंचे। यहां उन्होंने भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के कार्यकर्ताओं के साथ SIR (Special Intensive Revision) को लेकर बैठक की। बैठक में उन्होंने कार्यकर्ताओं से गांव-गांव जाकर मतदाता सूची में नाम हटाए जाने, दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किए जाने या मतदाताओं को अनुपस्थित बताए जाने की जानकारी जुटाने का निर्देश दिया।

14 हजार आदिवासी मतदाताओं के नाम हटाने का दावा

बाबूलाल मरांडी ने दावा किया कि जामताड़ा विधानसभा क्षेत्र में करीब 14 हजार आदिवासी मतदाताओं के नाम अनुपस्थित या दूसरे स्थान पर स्थानांतरित होने का हवाला देकर मतदाता सूची से हटाए गए हैं।

उन्होंने इसे गंभीर मामला बताते हुए इसकी जांच कराने की मांग की। मरांडी ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई स्थानीय मंत्री और विधायक के इशारे पर की गई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है

मरांडी ने भाजपा कार्यकर्ताओं से कहा कि वे प्रभावित मतदाताओं से संपर्क कर वास्तविक स्थिति की जानकारी जुटाएं और जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटे हैं, उनकी जानकारी सामने लाएं।

MMDR संशोधन बिल पर कांग्रेस-झामुमो को घेरा

बाबूलाल मरांडी ने MMDR संशोधन बिल को लेकर भी कांग्रेस और झामुमो पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि अतिरिक्त टैक्स और सेस की वजह से झारखंड से कोयला और आयरन की खरीद महंगी हो रही है।

मरांडी के मुताबिक, 30 टन कोयला ले जाने वाले एक हाईवा पर करीब 13,500 रुपये और 30 टन आयरन पर करीब 18 हजार रुपये अतिरिक्त सेस का बोझ पड़ता है। उनका दावा है कि अतिरिक्त लागत बढ़ने से खरीदार दूसरे राज्यों या विदेशों से खनिज खरीदने को प्राथमिकता दे सकते हैं।

खनिज कारोबार और रोजगार पर जताई चिंता

नेता प्रतिपक्ष ने झारखंड में खदानों की नीलामी और उनके संचालन को लेकर भी राज्य सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि खनिज आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के बजाय अतिरिक्त टैक्स लगाने से उत्पादन, कारोबार और रोजगार पर असर पड़ सकता है।

मरांडी ने कहा कि राज्य में खदानों को सुचारू रूप से संचालित करने और खनिज आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने से सरकार के राजस्व में बढ़ोतरी हो सकती है। उन्होंने सरकार से खदानों की नीलामी की प्रक्रिया तेज करने और उद्योगों के लिए बेहतर माहौल बनाने की मांग की।

मौके पर भाजपा जिलाध्यक्ष सुमित शरण, माधव चंद्र महतो, सत्यानंद झा समेत भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के कई कार्यकर्ता और नेता मौजूद रहे।

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