सरायकेला में अवैध निर्माण पर अर्जुन मुंडा का बड़ा आरोप, डोबो-कपाली में भूमि उपयोग पर उठाए सवाल

डोबो-कपाली में अवैध निर्माण पर अर्जुन मुंडा का आरोप

सरायकेला: डोबो-कपाली में अवैध निर्माण पर अर्जुन मुंडा ने उठाए सवाल, भूमि उपयोग परिवर्तन की जांच की मांग

Saraikela: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने सरायकेला-खरसावां जिले के डोबो, कपाली और आसपास के अनुसूचित क्षेत्रों में कृषि भूमि के नेचर बदलने और बहुमंजिला निर्माण को लेकर सवाल उठाए हैं। जमशेदपुर के निर्मल गेस्ट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने इन मामलों की जांच कराने और भूमि उपयोग से जुड़े नियमों की समीक्षा करने की मांग की।

डोबो-कपाली में निर्माण को लेकर उठाए सवाल

अर्जुन मुंडा ने आरोप लगाया कि अनुसूचित क्षेत्रों में भूमि उपयोग और निर्माण से जुड़े मामलों में संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में भूमि से जुड़े मामलों को केवल राजस्व या निबंधन की प्रक्रिया तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता।

उन्होंने विशेष रूप से CNT Act और संविधान की पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई।

कृषि भूमि के उपयोग परिवर्तन पर जांच की मांग

अर्जुन मुंडा ने डोबो और कपाली क्षेत्र में कृषि भूमि के उपयोग में बदलाव तथा बहुमंजिला निर्माण का मुद्दा उठाया। उन्होंने नदी क्षेत्र में हो रहे निर्माण की भी जांच की मांग की।

उन्होंने कहा कि कृषि भूमि की रजिस्ट्री कृषि भूमि के रूप में ही होनी चाहिए और यदि बाद में इसका व्यावसायिक या औद्योगिक इस्तेमाल किया जाना है तो इसके लिए निर्धारित नियमों के तहत अनुमति लेना जरूरी है।

अब तक मिली अनुमतियों की समीक्षा की मांग

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने क्षेत्र में अब तक भूमि उपयोग परिवर्तन और निर्माण के लिए दी गई अनुमतियों की समीक्षा करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि कहीं नियमों का उल्लंघन हुआ है तो संबंधित मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

सरकार से श्वेत पत्र जारी करने की मांग

अर्जुन मुंडा ने झारखंड सरकार से भूमि उपयोग परिवर्तन को लेकर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि अनुसूचित क्षेत्रों में कृषि भूमि के उपयोग परिवर्तन और निर्माण को लेकर अब तक क्या प्रक्रिया अपनाई गई है और कितनी अनुमति दी गई है।

उन्होंने सरकार से डोबो-कपाली समेत संबंधित क्षेत्रों में भूमि उपयोग और निर्माण से जुड़े मामलों की पारदर्शी तरीके से समीक्षा करने की मांग की।

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