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झारखंड राज्यसभा चुनाव: सीट बंटवारे पर सियासी घमासान, गठबंधन पर संकट ?

गठबंधन की परीक्षा: झारखंड में राज्यसभा सीटों को लेकर बढ़ा तनाव

झारखंड राज्यसभा चुनाव: गठबंधन में बढ़ी खींचतान, ‘बड़े भाई’ की जंग तेज

झारखंड में राज्यसभा चुनाव की आहट के साथ ही सियासी हलचल तेज हो गई है। दो सीटों पर होने वाले इस चुनाव ने सत्तारूढ़ इंडिया गठबंधन के भीतर दरारें उजागर कर दी हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर टकराव खुलकर सामने आ गया है।

गठबंधन के पास विधानसभा में मजबूत बहुमत है। 81 सदस्यीय सदन में 56 विधायकों के समर्थन के साथ दोनों सीटों पर जीत लगभग तय मानी जा रही है। लेकिन विवाद इस बात पर है कि उम्मीदवार किस पार्टी से होगा। कांग्रेस इस बार अपनी हिस्सेदारी चाहती है, जबकि झामुमो दोनों सीटों पर दावा ठोक रही है।

कांग्रेस का तर्क है कि उसने पिछले कई चुनावों में गठबंधन धर्म निभाते हुए झामुमो का समर्थन किया है। 2018 में धीरज साहू के राज्यसभा पहुंचने के बाद से अब तक हुए तीन चुनावों में झामुमो के उम्मीदवार—शिबू सोरेन, महुआ माजी और सरफराज अहमद—ही चुने गए हैं। ऐसे में कांग्रेस इस बार पीछे हटने के मूड में नहीं है।

वहीं झामुमो, जो 34 विधायकों के साथ सबसे बड़ा दल है, अपनी राजनीतिक ताकत के आधार पर दोनों सीटों पर दावेदारी कर रहा है। पार्टी एक सीट को अपने दिवंगत नेता शिबू सोरेन की विरासत से जुड़ा मानते हुए किसी भी कीमत पर छोड़ना नहीं चाहती।

साफ है कि अगर गठबंधन के भीतर सहमति बनती है, तो दोनों सीटें आसानी से सत्ताधारी खेमे के खाते में जाएंगी। लेकिन अगर खींचतान बढ़ती है और कांग्रेस असंतुष्ट रहती है, तो भारतीय जनता पार्टी को मौका मिल सकता है, भले ही उसके पास संख्या बल कम हो।

अब सबकी नजर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेतृत्व के बीच होने वाली बातचीत पर है। यही तय करेगा कि गठबंधन एकजुट रहता है या ‘बड़े भाई’ की लड़ाई और गहराती है।

फिलहाल, झारखंड की राजनीति में राज्यसभा चुनाव केवल सीटों की लड़ाई नहीं, बल्कि गठबंधन की मजबूती की असली परीक्षा बन चुका है।

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