JSSC-CGL के बाद अब परीक्षा सिस्टम बदलने की तैयारी, देवेंद्र नाथ महतो ने बनाया Blueprint; सरकार के सामने रखेंगे प्लान

JSSC-CGL के बाद अब ‘सिस्टम सुधार’ की लड़ाई, देवेंद्र महतो ने तैयार किया परीक्षा सुधार का Blueprint

JSSC-CGL के बाद अब बदलेगा परीक्षा सिस्टम? देवेंद्र नाथ महतो ने तैयार किया ‘Blueprint’, सरकार के सामने रखेंगे पूरा प्लान

Ranchi: JSSC-CGL समेत कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द किए जाने के बाद झारखंड में परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग ने नया रूप ले लिया है। लंबे समय से छात्र आंदोलन का नेतृत्व कर रहे देवेंद्र नाथ महतो ने अब भर्ती परीक्षाओं को भ्रष्टाचार मुक्त और पेपर लीक-प्रूफ बनाने के लिए एक ‘Blueprint’ तैयार किया है। इसे जल्द ही राज्य सरकार के सामने रखा जाएगा।

देवेंद्र नाथ महतो का कहना है कि केवल जांच और परीक्षा रद्द करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए परीक्षा प्रणाली में बुनियादी और स्थायी बदलाव जरूरी हैं।

परीक्षा रद्द होने के बाद आंदोलन का नया चरण

JSSC-CGL समेत 14 परीक्षाओं को रद्द करने के सरकार के फैसले को देवेंद्र नाथ महतो ने छात्रों की बड़ी जीत बताया है। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि इससे आंदोलन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

उनके अनुसार, अब आंदोलन का अगला चरण JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं को पारदर्शी, निष्पक्ष और पेपर लीक से मुक्त बनाने पर केंद्रित होगा।

उन्होंने कहा कि अभ्यर्थियों को बार-बार परीक्षा रद्द होने, रिजल्ट में बदलाव और भर्ती प्रक्रिया लंबी खिंचने जैसी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़े, इसके लिए परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार आवश्यक है।

क्या है देवेंद्र महतो का Blueprint?

देवेंद्र नाथ महतो ने परीक्षा सुधार के लिए तैयार किए गए Blueprint के सभी बिंदुओं को अभी सार्वजनिक नहीं किया है। हालांकि, उनके मुताबिक इसका मुख्य उद्देश्य भर्ती परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है।

Blueprint में संभावित तौर पर प्रश्नपत्र की सुरक्षा, परीक्षा की निगरानी, पारदर्शी प्रक्रिया, जवाबदेही और पेपर लीक की रोकथाम जैसे मुद्दों पर सुझाव शामिल हो सकते हैं।

हालांकि, इसके विस्तृत प्रावधान सरकार के सामने प्रस्ताव रखे जाने के बाद ही स्पष्ट होंगे।

सिर्फ CID या CBI जांच से समाधान नहीं: देवेंद्र महतो

देवेंद्र महतो का जोर इस बात पर है कि किसी परीक्षा में गड़बड़ी सामने आने के बाद केवल जांच एजेंसी को जांच सौंपना पर्याप्त नहीं है।

उनका मानना है कि ऐसी व्यवस्था तैयार करनी होगी जिसमें पेपर लीक की संभावना न्यूनतम हो और किसी भी स्तर पर अनियमितता होने पर जिम्मेदारी तय की जा सके।

उन्होंने भविष्य की भर्ती परीक्षाओं को लेकर सरकार से स्थायी समाधान और अभ्यर्थियों को भरोसे की गारंटी देने की मांग की है।

सरकार ने भी बनाई परीक्षा सुधार समिति

दूसरी ओर, झारखंड सरकार ने भी परीक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में कदम उठाने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने JSSC-CGL और TDPL से जुड़ी परीक्षाओं को रद्द करने के साथ परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए समिति गठित करने की बात कही है।

वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में बनाई गई परीक्षा सुधार समिति से भर्ती परीक्षाओं को बेहतर और पारदर्शी बनाने के लिए सुझाव देने की उम्मीद है।

ऐसे में अब छात्र नेता का Blueprint और सरकार की परीक्षा सुधार समिति की सिफारिशें आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

2014 से अब तक की परीक्षाएं भी जांच के दायरे में

झारखंड सरकार ने वर्ष 2014 से अब तक आयोजित भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की व्यापक जांच कराने की घोषणा की है। JPSC सिविल सेवा परीक्षा से जुड़े मामलों की जांच सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में कराने की बात भी सामने आई है।

सरकार का दावा है कि जांच के जरिए भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की तह तक पहुंचने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

अब आगे क्या होगा?

JSSC-CGL समेत कई परीक्षाओं के रद्द होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल भविष्य की भर्ती परीक्षाओं को लेकर है। अभ्यर्थी जानना चाहते हैं कि नई व्यवस्था क्या होगी और उन्हें परीक्षा प्रक्रिया में कितनी पारदर्शिता की गारंटी मिलेगी।

ऐसे में देवेंद्र नाथ महतो का Blueprint और सरकार की परीक्षा सुधार समिति दोनों पर छात्रों और अभ्यर्थियों की नजर रहेगी। यदि सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के सुझावों के बीच सहमति बनती है, तो इसका असर झारखंड की आगामी JPSC और JSSC परीक्षाओं की पूरी व्यवस्था पर पड़ सकता है।

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