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PLFI सुप्रीमो दिनेश गोप केस: अदालत में सुनवाई, डेढ़ दर्जन से अधिक आरोपियों पर चार्ज फ्रेम होना है

PLFI सुप्रीमो दिनेश गोप के 20 करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रांची की विशेष अदालत में सुनवाई हुई। दिनेश गोप की पेशी नहीं हो सकी। अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी।

दिनेश गोप के 20 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुनवाई, अब 23 नवंबर को होगी अगली तारीख

रांची: प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन PLFI के सुप्रीमो दिनेश गोप से जुड़े 20 करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मंगलवार को विशेष अदालत में सुनवाई हुई। मनी लॉन्ड्रिंग मामले के विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान दिनेश गोप को पलामू जेल से पेश किया जाना था, लेकिन किसी कारणवश उसकी पेशी नहीं हो सकी। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 23 नवंबर की तारीख निर्धारित की है।

इस मामले में 24 सितंबर को सभी आरोपियों को पेन ड्राइव के माध्यम से पुलिस पेपर उपलब्ध कराया गया था। दिनेश गोप, उसकी दोनों पत्नियों सहित डेढ़ दर्जन से अधिक आरोपियों के खिलाफ आरोप गठित किए जाने की प्रक्रिया होनी है।

आरोपियों ने बॉन्ड की अवधि बढ़ाने की अर्जी दी

पिछली सुनवाई में आरोपी जितेंद्र कुमार, सुमंत कुमार, फैसल मूसा, विनय कुमार जालान, जनार्दन कुमार सोनी, नंद लाल सोनी, अमित कुमार उर्फ अमित जायसवाल, चंद्रशेखर कुमार, जय प्रकाश सिंह भुइयां, नंद किशोर महतो, फुलेश्वर गोप, हीरा देवी, शकुंतला कुमारी, अरुण गोप, बिनोद कुमार सहित अन्य आरोपियों ने CrPC की धारा 88 के तहत बॉन्ड की अवधि बढ़ाने के लिए आवेदन दिया था।

आवेदन की प्रति प्रवर्तन निदेशालय (ED) के विशेष लोक अभियोजक को उपलब्ध कराई गई। सुनवाई के बाद अदालत ने अर्जी स्वीकार करते हुए संबंधित आरोपियों के बॉन्ड की अवधि अगली तारीख तक बढ़ा दी।

फैसल मूसा की अर्जी पर अभियोजन पक्ष से जवाब मांगा

आरोपी फैसल मूसा के वकील ने अदालत को बताया कि उन्होंने 31 जुलाई को CrPC की धारा 306 के तहत माफी देने और आरोपियों की सूची से नाम हटाने के लिए आवेदन दाखिल किया था। हालांकि, उस दिन की ऑर्डर शीट में गलती से आवेदन का उल्लेख नहीं हो पाया था।

अदालत में इस आवेदन का उल्लेख किए जाने के बाद अभियोजन पक्ष को निर्देश दिया गया कि वह निर्धारित तारीख तक जितेंद्र कुमार और फैसल मूसा की अर्जियों पर जवाब दाखिल करे।

क्या है मामला?

NIA और ED की जांच के अनुसार, विनोद कुमार, चंद्रशेखर कुमार, नंद किशोर महतो और मोहन कुमार को PLFI सुप्रीमो दिनेश गोप का करीबी बताया गया है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इन लोगों ने आपराधिक साजिश के तहत PLFI के लेवी और रंगदारी के पैसे जुटाने में मदद की।

जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि सुमंत कुमार, नंदलाल स्वर्णकार, चंद्रशेखर सिंह, अरुण गोप, जितेंद्र कुमार, नवीन भाई जयंती भाई पटेल और दिनेश गोप ने कथित तौर पर लेवी-रंगदारी की रकम शेल कंपनियों के जरिए खपाई।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह रकम ठेकेदारों, कारोबारियों और विकास परियोजनाओं से लेवी के रूप में वसूली गई थी। मामले में आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया जारी है।

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