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एल ख्यांग्ते के आवासीय कार्यालय से मिले 8 एडमिट कार्ड, TDPL के टेंडर पर सवाल

8 एडमिट कार्ड बरामद, TDPL को टेंडर देने की प्रक्रिया जांच के घेरे में

JPSC परीक्षा विवाद: एल ख्यांग्ते के आवासीय कार्यालय से मिले 8 एडमिट कार्ड, TDPL को टेंडर देने पर भी सवाल

 

रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर CID की जांच में कई अहम बिंदु सामने आने का दावा किया गया है। जांच से जुड़े दस्तावेजों और बयानों के हवाले से परीक्षा संचालन के लिए एजेंसियों के चयन, टेंडर प्रक्रिया, OMR स्कैनिंग और अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड से जुड़े सवाल उठे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका और परीक्षा प्रक्रिया में कथित हस्तक्षेप की भी जांच की जा रही है।

 

नियमित परीक्षा नियंत्रक के अवकाश के दौरान TDPL को मिला काम

 

रिपोर्ट के अनुसार, 5 जून 2025 को श्वेता गुप्ता की नोटशीट पर TDPL को L1 यानी सबसे कम बोली लगाने वाली एजेंसी बताते हुए नामित करने की अनुशंसा की गई थी। बताया गया है कि आयोग के अध्यक्ष ने उसी दिन इस प्रस्ताव को मंजूरी दी।

 

आरोप है कि नियमित परीक्षा नियंत्रक के अवकाश पर रहने के दौरान प्रभारी के रूप में श्वेता गुप्ता ने TDPL को नामांकन पत्र, प्रश्नपत्र, OMR और कोडिंग-डिकोडिंग से संबंधित काम सौंपा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि श्वेता गुप्ता के स्थानांतरण के समय आयोग के अध्यक्ष ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर उनका तबादला कम से कम पांच महीने रोकने का आग्रह किया था। इसी अवधि में TDPL के अनुबंध को भी आगे बढ़ाया गया।

 

OMR स्कैनिंग और स्ट्रॉन्ग रूम की प्रक्रिया पर सवाल

 

जांच से जुड़े विवरणों के मुताबिक, OMR स्कैनिंग के बाद सामग्री को उसी दिन स्ट्रॉन्ग रूम में वापस जमा करने के निर्धारित नियम के पालन पर भी सवाल उठे हैं।

 

रिपोर्ट में तत्कालीन उप-परीक्षा नियंत्रक सरोजनी रजनी तिर्की का भी उल्लेख है। दावा किया गया है कि उन्होंने कथित गड़बड़ी की जानकारी मिलने के बाद 14वीं JPSC की फाइल पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया था। हालांकि, बाद में उन पर दबाव बनाए जाने और फाइल पर हस्ताक्षर करने का आरोप लगाया गया है।

 

एल ख्यांग्ते के आवासीय कार्यालय से मिले आठ एडमिट कार्ड

 

रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व मुख्य सचिव एल ख्यांग्ते के आवासीय कार्यालय से FRO मेंस परीक्षा के आठ अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड बरामद किए गए। इस बरामदगी को लेकर जांच में सवाल उठाए गए हैं।

 

जांच में धर्मेंद्र कुमार नाम के व्यक्ति की भूमिका भी सामने आने का दावा किया गया है, जो मुख्य सचिव के आवासीय कार्यालय से जुड़ा था। रिपोर्ट में आरोप है कि उसने बिचौलिये की भूमिका निभाते हुए TDPL और Binsys जैसी एजेंसियों को इम्पैनल कराने में मदद की और इसके बदले पैसे लिए।

 

यह भी आरोप लगाया गया है कि FRO और ACF परीक्षाओं में अभ्यर्थियों के चयन तथा प्रश्नपत्र लीक कराने के लिए TDPL के निदेशकों पर दबाव बनाया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, धर्मेंद्र कुमार ने रवि मास्टर को पैसे देकर अभ्यर्थियों के रोल नंबर सत्यपाल तक पहुंचाए, जिसके बाद संबंधित अभ्यर्थियों के सफल होने का दावा किया गया है।

 

एजेंसियों के चयन और टेंडर प्रक्रिया पर भी उठे सवाल

 

CID जांच से जुड़े दस्तावेजों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि परीक्षा संचालन के लिए एजेंसियों के चयन में प्रतिस्पर्धा की निष्पक्षता पर सवाल उठे हैं।

 

रिपोर्ट के मुताबिक, ALPS Solutions और NAIVE Assessment के निदेशक के रूप में एक ही व्यक्ति गौरव भुटानी का नाम सामने आया। दोनों कंपनियों के बीच संभावित संबंधों को लेकर भी जांच में सवाल उठाए गए हैं।

 

दस्तावेजों के अनुसार, गौरव भुटानी ने CID को दिए बयान में कहा कि उनकी कंपनियों ने JPSC की किसी परीक्षा के लिए प्रस्ताव नहीं दिया था। दूसरी ओर, TDPL के लखनऊ कार्यालय से ALPS/JPSC/2025-26/28 संदर्भ वाला प्रस्ताव-पत्र जब्त किए जाने की बात कही गई है।

 

रिपोर्ट में अध्ययन, नालंदा IT लैब्स और Binsys जैसी कंपनियों के निदेशक के रूप में अरुण कुमार का नाम भी दर्ज होने का उल्लेख है। इन तथ्यों के आधार पर एजेंसियों के चयन और टेंडर प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए हैं।

 

परीक्षा की पारदर्शिता पर फिर उठे सवाल

 

JPSC की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़े इन खुलासों ने परीक्षा संचालन, एजेंसी चयन, OMR प्रबंधन और अभ्यर्थियों के चयन की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

 

हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी। संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना चाहिए।

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