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मन की बात में PM मोदी का स्वच्छता संदेश,

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में दिवाली और छठ पर स्वच्छता बनाए रखने की अपील की।

‘मन की बात’ में PM मोदी का स्वच्छता संदेश, दिवाली और छठ पर सफाई रखने की अपील

 

नई दिल्ली/रांची: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के जरिए देशवासियों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने दिवाली और छठ पर्व के अवसर पर स्वच्छता बनाए रखने का संदेश दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि समाज में वास्तविक बदलाव सामूहिक प्रयासों और जनभागीदारी से ही आता है। उन्होंने पंजाब में जैविक कपास की खेती और उत्तराखंड में हेवल नदी के पुनर्जीवन जैसे प्रयासों का भी उल्लेख किया।

 

‘मन की बात’ को देशवासियों के प्रयासों से जुड़ने का माध्यम बताया

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ‘मन की बात’ उनके लिए देशवासियों के प्रयासों को करीब से जानने और समाज के लिए योगदान देने वाले लोगों के कार्यों को नमन करने का अवसर है। कार्यक्रम में उन्होंने उन पहलों का जिक्र किया, जिनमें स्थानीय समुदायों ने मिलकर पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास की दिशा में काम किया है।

 

उन्होंने दिवाली और छठ जैसे प्रमुख त्योहारों के दौरान स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने की अपील की। त्योहारों के समय सार्वजनिक स्थानों, जलस्रोतों और आसपास के क्षेत्रों को साफ रखने में लोगों की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया।

 

पंजाब के जैविक कपास अभियान की चर्चा

 

प्रधानमंत्री ने पंजाब के ‘खेती विरासत मिशन’ का उल्लेख करते हुए पारंपरिक कृषि और जैविक खेती को बढ़ावा देने के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने मालवा क्षेत्र में ‘नव-त्रिन्जन’ पहल का जिक्र किया, जिसके तहत बिना रासायनिक खाद और कीटनाशकों के जैविक कपास उगाने पर काम किया जा रहा है।

 

इस पहल की खास बात प्राकृतिक रंगों वाली कपास का उत्पादन है। इससे तैयार धागों और कपड़ों को रंगने के लिए अतिरिक्त रासायनिक रंगों की जरूरत कम करने में मदद मिल सकती है। यह पहल पर्यावरण के अनुकूल कृषि और टिकाऊ वस्त्र उत्पादन की संभावनाओं को सामने लाती है।

 

उत्तराखंड में हेवल नदी के पुनर्जीवन का उदाहरण

 

प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल क्षेत्र में हेवल नदी को पुनर्जीवित करने के प्रयासों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों ने मिलकर नदी और आसपास के प्राकृतिक जलस्रोतों को बचाने के लिए काम किया।

 

इस अभियान में वर्षा जल संचयन, जमीन में पानी के पुनर्भरण और पौधारोपण जैसे उपायों पर ध्यान दिया गया। सामूहिक प्रयासों से नदी और क्षेत्र के प्राकृतिक जलस्रोतों को फिर से जीवंत करने की दिशा में काम हुआ।

 

जनभागीदारी से पर्यावरण संरक्षण पर जोर

 

प्रधानमंत्री के संबोधन में स्वच्छता, जैविक खेती और जल संरक्षण जैसे विषय प्रमुख रहे। पंजाब की जैविक कपास पहल और उत्तराखंड में नदी पुनर्जीवन के उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने स्थानीय स्तर पर लोगों की भागीदारी के महत्व को रेखांकित किया।

 

संदेश यह रहा कि पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता जैसे कार्य केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से भी आगे बढ़ते हैं। दिवाली और छठ के अवसर पर स्वच्छता बनाए रखने की अपील इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश है।

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