सिल्ली – Sudesh Mahto: सिल्ली स्टेडियम शनिवार को मांदर की थाप, ढोल-नगाड़ों की गूंज और पारंपरिक करम गीतों से सराबोर रहा। करम अखाड़ा समिति के तत्वावधान में आयोजित विधानसभा स्तरीय आखड़ाय करम महोत्सव में क्षेत्र के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए।
कार्यक्रम में पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं आजसू पार्टी अध्यक्ष सुदेश कुमार महतो समेत कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग शामिल हुए। पारंपरिक गीत और नृत्य के बीच सुदेश महतो स्वयं करम नृत्य में शामिल हुए और ग्रामीणों का उत्साह बढ़ाया।
महोत्सव को संबोधित करते हुए सुदेश कुमार महतो ने कहा, “आखड़ाय करम महोत्सव हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक है। करम पर्व प्रकृति, परंपरा और सामुदायिक जीवन से जुड़ा पर्व है। ऐसे आयोजन हमारी लोक संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।”
उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी भाषा, संस्कृति, परंपरा और लोककला से जोड़ना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। गांवों की पारंपरिक संस्कृति को ऐसे आयोजनों से नई पहचान मिलती है। उन्होंने आयोजन समिति और क्षेत्रवासियों को सफल आयोजन के लिए बधाई दी।
कार्यक्रम में ढोल-नगाड़ों और मांदर की थाप शुरू होते ही मंच से लेकर मैदान तक करम नृत्य का रंग छा गया। सुदेश कुमार महतो ने करमा नृत्य दल के साथ मंच पर नृत्य किया। इसके बाद वे ग्रामीणों के साथ मैदान में आयोजित सामूहिक करम नृत्य में भी शामिल हुए। उनके साथ गिरिडीह सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी, मांडू विधायक निर्मल महतो, पूर्व विधायक लंबोदर महतो, आयोजन समिति के जयपाल सिंह, पूर्व जिला परिषद सदस्य गौतम कृष्ण साहू और ब्रजेश प्रसाद समेत अन्य अतिथियों ने भी ग्रामीणों के साथ नृत्य किया।
अतिथियों के ग्रामीणों के साथ सहजता से शामिल होने से पूरा स्टेडियम उत्सव के रंग में डूब गया। पारंपरिक वेशभूषा, करम गीत, मांदर और सामूहिक नृत्य ने कार्यक्रम को विशिष्ट सांस्कृतिक स्वरूप दिया। महिला, पुरुष और युवाओं ने उत्साहपूर्वक सामूहिक नृत्य में हिस्सा लिया।
महोत्सव में लोक कलाकार बुटन देवी, जिला परिषद उपाध्यक्ष वीणा चौधरी, पूर्व जिला परिषद उपाध्यक्ष चित्तरंजन महतो, प्रमुख जितेंद्र नाथ बड़ाइक और लॉन बॉल के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी दिनेश महतो समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
आयोजन समिति के जयपाल सिंह ने कहा कि आखड़ाय करम महोत्सव का उद्देश्य क्षेत्र की पारंपरिक संस्कृति, लोकगीत और लोकनृत्य को संरक्षित करना तथा नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से ग्रामीण क्षेत्र की लोक परंपराओं को मंच मिलता है और युवाओं में अपनी संस्कृति के प्रति जुड़ाव मजबूत होता है।
महोत्सव के सफल आयोजन में चारु बाला देवी, लता महतो, सविता रानी, बबीता देवी, दीपा बड़ाइक, कल्याणी कुमारी, लक्ष्मण महतो और विकास महतो सहित समिति के सदस्यों एवं क्षेत्रवासियों का सराहनीय योगदान रहा।
यह भी पढ़े: Merchant Discount Rate: ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर 0.4% MDR से मुरलीगंज के व्यापारियों में असमंजस, 15 अक्टूबर से प्रभावी होगी व्यवस्था



