
आदिवासी महाजुटान में हुंकार: जनसंख्या के अनुपात में बढ़े राजनीतिक प्रतिनिधित्व, खनिज संसाधनों पर राज्य का अधिकार
Ranchi: झारखंड की राजधानी रांची में रविवार को आयोजित आदिवासी महाजुटान में हजारों की संख्या में महिला, पुरुष और युवा शामिल हुए। मोरहाबादी मैदान में आयोजित इस महाजुटान में जल, जंगल, जमीन, आदिवासी अधिकार, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। कार्यक्रम के दौरान आदिवासी समाज के अधिकारों और भविष्य से जुड़े पांच प्रमुख प्रस्ताव पारित किए गए।
महाजुटान में वक्ताओं ने कहा कि झारखंड के आदिवासी समाज के अधिकारों के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। परिसीमन के बाद राजनीतिक प्रतिनिधित्व, खनिज संपदा पर राज्य का अधिकार, CNT-SPT एक्ट की सुरक्षा, ग्राम सभा के अधिकार और सरना धर्म कोड लागू करने की मांग को लेकर एकजुटता दिखाई गई।
परिसीमन के बाद जनसंख्या के अनुपात में मिले हिस्सेदारी
महाजुटान में पारित प्रमुख प्रस्तावों में आगामी परिसीमन के बाद आनुपातिक राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग सबसे प्रमुख रही। प्रस्ताव में कहा गया कि यदि परिसीमन के बाद लोकसभा और विधानसभा की सीटों की संख्या बढ़ती है, तो आदिवासी समुदाय के राजनीतिक प्रतिनिधित्व में भी उसी अनुपात में वृद्धि सुनिश्चित की जानी चाहिए।
आयोजकों का कहना है कि जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व मिलने से आदिवासी समाज की आवाज संसद और विधानसभा में और अधिक मजबूती से उठाई जा सकेगी।
खनिज संपदा पर राज्य के अधिकार की मांग
महाजुटान में MMDR संशोधन और खनिज संसाधनों से जुड़े अधिकारों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। प्रस्ताव में खनिज एवं प्राकृतिक संसाधनों पर राज्य के अधिकार को मजबूत करने की मांग की गई।
वक्ताओं ने कहा कि झारखंड देश के प्रमुख खनिज संपदा वाले राज्यों में शामिल है। यहां के कोयला, लौह अयस्क और अन्य प्राकृतिक संसाधनों से राज्य के विकास और स्थानीय लोगों के हित जुड़े हैं। ऐसे में खनिज संसाधनों से संबंधित नीतियों में राज्य की भूमिका और अधिकार महत्वपूर्ण होने चाहिए।
CNT और SPT एक्ट की सुरक्षा पर जोर
महाजुटान में छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT Act) और संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम (SPT Act) की सुरक्षा का प्रस्ताव भी पारित किया गया।
आयोजकों ने कहा कि आदिवासी जमीन और सामुदायिक अधिकारों की सुरक्षा में इन कानूनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसलिए इन कानूनों में किसी भी तरह के बदलाव या कमजोर किए जाने का विरोध किया जाएगा। प्रस्ताव में आदिवासी हितों से जुड़े इन कानूनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई।
भूमि अधिग्रहण और खनन में ग्राम सभा को अधिकार
पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में ग्राम सभा के अधिकारों को लेकर भी महाजुटान में जोरदार मांग उठी। प्रस्ताव में कहा गया कि भूमि अधिग्रहण, खनन और विस्थापन जैसे मामलों में स्थानीय ग्राम सभाओं की भूमिका को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
महाजुटान में शामिल लोगों ने कहा कि जिन परियोजनाओं से स्थानीय लोगों की जमीन, आजीविका और पर्यावरण प्रभावित होता है, उनमें प्रभावित समुदाय की सहमति और ग्राम सभा के निर्णय का सम्मान होना चाहिए।
सरना धर्म कोड जल्द लागू करने की मांग
आदिवासी समाज की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े सरना धर्म कोड की मांग भी महाजुटान के प्रमुख प्रस्तावों में शामिल रही। आयोजकों ने इसे आदिवासी समाज की पहचान और सांस्कृतिक अस्तित्व से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताया।
महाजुटान में सरना धर्म कोड को जल्द लागू करने की मांग करते हुए कहा गया कि आदिवासी समाज लंबे समय से इस मुद्दे को उठाता रहा है।
मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन की चेतावनी
महाजुटान में मौजूद हजारों लोगों ने पांचों प्रस्तावों का समर्थन किया। इस दौरान आयोजकों ने कहा कि यदि आदिवासी समाज की मांगों पर सरकारों की ओर से ठोस पहल नहीं की गई, तो लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।
महाजुटान में उठाए गए मुद्दों से साफ है कि परिसीमन, आदिवासी राजनीतिक प्रतिनिधित्व, जल-जंगल-जमीन, खनिज संसाधन, CNT-SPT एक्ट, ग्राम सभा और सरना धर्म कोड आने वाले समय में झारखंड की राजनीति में महत्वपूर्ण विषय बने रह सकते हैं।



