
झारखंड में प्रशासनिक संकट गहराया: 207 डिप्टी कलेक्टर और 35 DSP पद खाली, सचिवालय में भी बाबुओं की कमी
Ranchi: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को रद्द किए जाने के बाद अब इसका असर राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। JPSC और JSSC की नियुक्तियों पर लिए गए फैसले के बाद बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी प्रभावित हुए हैं। इससे एक ओर जिलों और प्रखंडों में अधिकारियों की कमी सामने आ रही है, वहीं दूसरी ओर सचिवालय में भी कामकाज प्रभावित होने की स्थिति बन गई है।
11वीं से 13वीं JPSC के माध्यम से चयनित 207 डिप्टी कलेक्टर और 35 DSP के पद खाली होने से फील्ड प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। वहीं JSSC-CGL के जरिए नियुक्त कर्मचारियों के हटने से सचिवालय में भी अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी महसूस की जा रही है।
207 डिप्टी कलेक्टर और 35 DSP के पद खाली
11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा के माध्यम से चयनित 207 अधिकारियों ने अक्टूबर 2025 में डिप्टी कलेक्टर के पद पर योगदान दिया था। इसके बाद उन्हें प्रशासनिक प्रशिक्षण के लिए ATI भेजा गया। मार्च 2026 में फील्ड ट्रेनिंग के लिए इन अधिकारियों को अलग-अलग जिलों में भेजा गया था।
जिलों में पहुंचने के बाद कई अधिकारियों को प्रखंड और अंचल स्तर पर प्रभारी व्यवस्था के तहत जिम्मेदारियां दी गई थीं। परीक्षा रद्द होने के फैसले के बाद अब इन पदों के खाली होने से प्रशासनिक व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है।
राज्य प्रशासनिक सेवा में कुल 1450 पद स्वीकृत बताए गए हैं। इनमें से 342 पद परीक्षा रद्द होने के कारण रिक्त होने की स्थिति में आ गए हैं।
271 प्रखंड-अंचलों में भी अधिकारियों की कमी
प्रशासनिक अधिकारियों की कमी का असर प्रखंड और अंचल स्तर पर भी नजर आ रहा है। राज्य में कुल 271 प्रखंड और अंचल हैं, लेकिन फिलहाल सभी जगह अलग-अलग BDO और CO की तैनाती संभव नहीं हो पा रही है।
बताया गया है कि 164 स्थानों पर अलग-अलग BDO और CO की व्यवस्था की गई है। वहीं:
- 54 प्रखंडों में BDO को CO का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
- 53 अंचलों में CO को BDO का अतिरिक्त प्रभार संभालना पड़ रहा है।
इस दोहरी जिम्मेदारी का सीधा असर प्रशासनिक कामकाज और आम लोगों से जुड़े कार्यों पर पड़ने की संभावना है।
प्रोन्नत अधिकारियों के सामने भी पदस्थापना का संकट
राज्य प्रशासनिक सेवा में एक और विरोधाभासी स्थिति सामने आ रही है। कई अधिकारी बेसिक ग्रेड से प्रोन्नत होकर SDM रैंक तक पहुंच चुके हैं, लेकिन उनके लिए पर्याप्त पद उपलब्ध नहीं होने के कारण पदस्थापना में परेशानी बनी हुई है।
एक तरफ सरकार को फील्ड में अधिकारियों की कमी का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ प्रोन्नत अधिकारियों को उनकी रैंक के अनुरूप जिम्मेदारी देने की चुनौती भी सामने है।
सचिवालय में भी कर्मचारियों की कमी
JSSC-CGL के जरिए चयनित कर्मचारियों पर कार्रवाई का असर सचिवालय में भी पड़ रहा है। परीक्षा के माध्यम से चयनित 1932 अभ्यर्थियों में से 1927 को नियुक्ति पत्र दिया गया था।
इनमें कई महत्वपूर्ण पद शामिल थे, जिनमें:
- सहायक प्रशाखा पदाधिकारी – 847
- कनीय सचिवालय सहायक – 288
- श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी – 170
- प्रखंड कल्याण पदाधिकारी – 191
- प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी – 249
- अंचल निरीक्षक – 178
- प्लानिंग असिस्टेंट – 4
इनमें सहायक प्रशाखा पदाधिकारी और कनीय सचिवालय सहायक के करीब 1135 कर्मचारी विभिन्न सचिवालयों में तैनात थे।
इन कर्मचारियों के हटने या फेरबदल के बाद सचिवालय में फाइलों के मूवमेंट और रोजमर्रा के प्रशासनिक कामकाज पर असर पड़ने की बात सामने आ रही है।
भर्ती परीक्षाओं के फैसले के बाद प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
JPSC और JSSC की परीक्षाओं को लेकर सरकार के फैसले का एक बड़ा उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच और व्यवस्था में सुधार है। लेकिन इसके साथ ही सरकार के सामने तत्काल चुनौती प्रशासनिक रिक्तियों को भरने और मौजूदा अधिकारियों-कर्मचारियों से कामकाज सुचारू रूप से जारी रखने की है।
अब देखना होगा कि सरकार खाली पदों, अतिरिक्त प्रभार और सचिवालय में कर्मचारियों की कमी से निपटने के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था करती है।



