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JPSC-JSSC मुद्दे पर विधानसभा में जयराम महतो का अनोखा विरोध, T-shirt से सरकार को दिया बड़ा संदेश

विधानसभा पहुंचे जयराम महतो की T-shirt बनी चर्चा का विषय, JPSC-JSSC विवाद पर उठाई CBI जांच की मांग

JPSC-JSSC विवाद की गूंज विधानसभा तक: जयराम महतो की T-shirt बनी चर्चा का विषय, सरकार को दिया संदेश

Ranchi: झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में रहा। शुक्रवार को डुमरी विधायक जयराम महतो विधानसभा पहुंचे तो उनकी लाल रंग की T-shirt ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उनकी टी-शर्ट पर JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर कई संदेश और जांच की मांग लिखी हुई थी।

विधानसभा परिसर में जयराम महतो का यह अनोखा अंदाज चर्चा का विषय बन गया। इसे छात्र आंदोलन के समर्थन और भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ एक सांकेतिक विरोध के रूप में देखा जा रहा है।

T-shirt के जरिए सरकार को दिया संदेश

जयराम महतो की टी-शर्ट पर भर्ती परीक्षाओं से जुड़े कई संदेश लिखे थे। इनमें TDPL द्वारा आयोजित JPSC-JSSC की कथित विवादित परीक्षाओं को रद्द करने, दोषियों की गिरफ्तारी और पूरे मामले की CBI एवं ED से जांच कराने की मांग प्रमुख रूप से दर्ज थी।

उन्होंने बिना अलग से बयान दिए अपने पहनावे के माध्यम से भर्ती विवाद और छात्र आंदोलन के मुद्दे को विधानसभा के भीतर और बाहर प्रमुखता से उठाने का प्रयास किया।

छात्र आंदोलन के समर्थन का संकेत

राजधानी रांची में पिछले कई दिनों से JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र आंदोलन जारी है। अभ्यर्थी पारदर्शी जांच, दोषियों पर कार्रवाई और विवादित परीक्षाओं को रद्द करने की मांग कर रहे हैं।

जयराम महतो का यह कदम उसी आंदोलन के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। विधानसभा परिसर में उनकी टी-शर्ट पर लिखे संदेशों ने मीडिया और अन्य विधायकों का भी ध्यान आकर्षित किया।

विधानसभा में भी गरमाया भर्ती विवाद

मानसून सत्र के दौरान JPSC-JSSC मुद्दा सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच प्रमुख राजनीतिक विषय बना हुआ है। विपक्ष लगातार भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर सरकार को घेर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि मामले की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जा रही है।

जयराम महतो की T-shirt के जरिए दिया गया संदेश इस बात का संकेत है कि भर्ती परीक्षाओं का मुद्दा अब केवल सड़क तक सीमित नहीं है, बल्कि विधानसभा के भीतर भी राजनीतिक बहस का प्रमुख केंद्र बन चुका है।

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