
रांची: CGL परीक्षा पर प्रतुल शाहदेव ने उठाए सवाल, बोले- हाईकोर्ट में एक ही मामले पर दो विरोधाभासी एफिडेविट क्यों?
झारखंड में JSSC-CGL परीक्षा को लेकर राजनीतिक बयानबाजी एक बार फिर तेज हो गई है। भाजपा के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने सीजीएल परीक्षा की जांच और राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट में दाखिल किए गए शपथपत्रों को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा को लेकर सरकार का रुख अलग-अलग चरणों में अलग रहा है।
पहली जांच में क्लीन चिट, बाद में गिरफ्तारियां
प्रतुल शाहदेव ने कहा कि एक समय CID की जांच के आधार पर सीजीएल परीक्षा को क्लीन चिट दी गई थी। उस समय यह कहा गया था कि परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ है। इसके बाद मामले की जांच आगे बढ़ी और सफल अभ्यर्थियों समेत कई लोगों की गिरफ्तारी हुई।
भाजपा नेता ने सवाल उठाया कि अगर पहली जांच सही थी तो बाद की जांच में नए साक्ष्य और गिरफ्तारियां कैसे सामने आईं? वहीं, अगर बाद की जांच सही है तो पहली जांच में परीक्षा को क्लीन चिट किस आधार पर दी गई थी?
125 में से 115 प्रश्नों के कथित लीक का किया जिक्र
प्रतुल शाहदेव ने कहा कि पहली CID जांच में 125 में से 115 प्रश्नों के कथित तौर पर लीक होने की बात को गेस पेपर से जोड़कर देखा गया था। इसके बाद हुई जांच में परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठे और सीटों के कथित सौदे की बात भी सामने आई।
उन्होंने दावा किया कि बाद की जांच के आधार पर राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में दाखिल शपथपत्र में परीक्षा की पवित्रता प्रभावित होने की बात कही।
‘एक ही मामले में दो अलग रुख क्यों?’
प्रतुल शाहदेव ने सवाल किया कि एक ही परीक्षा को लेकर सरकार की ओर से अलग-अलग समय पर दाखिल शपथपत्रों में अलग रुख क्यों दिखाई दिया। उन्होंने इसे गंभीर विषय बताते हुए सरकार से पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
पहली जांच करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
भाजपा प्रवक्ता ने यह भी सवाल उठाया कि सीजीएल परीक्षा की पहली जांच करने वाले CID अधिकारियों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई हुई है। उनका कहना है कि यदि पहली जांच गलत थी तो उस जांच के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
प्रतुल शाहदेव ने राज्य सरकार से सीजीएल परीक्षा मामले में अब तक हुई जांच, कार्रवाई और जिम्मेदारी तय किए जाने की स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि परीक्षा से जुड़े पूरे मामले में सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।



