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झारखंड के 51 विश्वविद्यालय और कॉलेज जारी करेंगे

डिजिटल डिग्री, छात्रों को नहीं लगाने होंगे चक्कर

झारखंड के 51 उच्च शिक्षण संस्थान जारी करेंगे डिजिटल डिग्री, छात्रों को प्रमाण पत्र के लिए नहीं लगाने होंगे चक्कर

 

रांची। झारखंड में उच्च शिक्षा को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राष्ट्रीय शैक्षणिक डिपॉजिटरी (NAD) और अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (ABC) प्रणाली के तहत राज्य के 51 विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और तकनीकी संस्थानों को “अवार्डिंग इंस्टीट्यूशन” के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। अब ये संस्थान छात्रों की डिग्री, डिप्लोमा और अन्य शैक्षणिक प्रमाण पत्र डिजिटल रूप से जारी और सुरक्षित रख सकेंगे।

 

नई व्यवस्था लागू होने के बाद विद्यार्थियों को डिग्री या प्रमाण पत्र की हार्ड कॉपी के लिए विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सभी शैक्षणिक दस्तावेज डिजिटल लॉकर और राष्ट्रीय शैक्षणिक डिपॉजिटरी में सुरक्षित रहेंगे, जिन्हें कहीं भी ऑनलाइन सत्यापित किया जा सकेगा।

 

फर्जी डिग्री पर लगेगी रोक

 

उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह पहल नई शिक्षा नीति-2020 के तहत अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (ABC) प्रणाली को मजबूत करने के उद्देश्य से की गई है। इससे छात्रों को विभिन्न संस्थानों से अर्जित क्रेडिट को एक जगह संग्रहित करने और जरूरत पड़ने पर उनका उपयोग करने की सुविधा मिलेगी। इससे मल्टीपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम को भी बढ़ावा मिलेगा।

 

डिजिटल डिग्री व्यवस्था लागू होने से फर्जी डिग्री और दस्तावेजों पर भी प्रभावी रोक लगने की उम्मीद है। नौकरी, छात्रवृत्ति, उच्च शिक्षा और विदेशों में प्रवेश के दौरान दस्तावेजों का सत्यापन आसान और तेज हो जाएगा।

 

केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालय भी शामिल

 

इस सूची में केंद्रीय विश्वविद्यालय, राज्य विश्वविद्यालय, निजी विश्वविद्यालय, इंजीनियरिंग, प्रबंधन और विधि शिक्षण संस्थानों सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों को शामिल किया गया है। इनमें रांची विश्वविद्यालय, विनोबा भावे विश्वविद्यालय, कोल्हान विश्वविद्यालय, सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय, केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड, आईआईटी-आईएसएम धनबाद, आईआईएम रांची, एनआईटी जमशेदपुर, एक्सएलआरआई, बीआईटी मेसरा और अन्य संस्थान शामिल हैं।

 

शिक्षा विभाग का मानना है कि आने वाले वर्षों में सभी शैक्षणिक अभिलेखों के डिजिटलीकरण से उच्च शिक्षा व्यवस्था और अधिक पारदर्शी होगी और छात्रों को राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत डिजिटल शैक्षणिक पहचान मिल सकेगी।

 

यह पहल राज्य के लाखों वर्तमान और पूर्व छात्रों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।

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