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लालू यादव के जन्मदिन पर छोटू छलिया को दिए गए कंगनों को लेकर विवाद बढ़ा

राबड़ी के कंगन पर बवाल! RJD का बड़ा पलटवार

कंगन विवाद पर RJD MLC सुनील सिंह का पलटवार, बोले- राबड़ी देवी हीरे नहीं पहनतीं, जनता को किया जा रहा गुमराह

Patna: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सुप्रीमो Lalu Prasad Yadav के जन्मदिन समारोह में लोक गायक छोटू छलिया को मिले कंगनों को लेकर शुरू हुआ सियासी विवाद अब और गहरा गया है। इस मामले में RJD के विधान परिषद सदस्य Sunil Kumar Singh ने बड़ा बयान देते हुए विपक्ष पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया है।

सुनील सिंह ने कहा कि राबड़ी देवी कभी हीरे के आभूषण नहीं पहनती हैं और हर चमकने वाली चीज हीरा नहीं होती। उन्होंने कहा कि कुछ लोग बिना तथ्य जाने राजनीतिक आरोप लगा रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, गुरुवार को लालू यादव के 79वें जन्मदिन के अवसर पर पटना स्थित आवास पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में भोजपुरी लोक गायक छोटू छलिया ने तेजस्वी यादव के बेटे इराज लालू यादव पर एक सोहर गीत प्रस्तुत किया था। गीत से प्रभावित होकर Rabri Devi ने अपने हाथों के कंगन उतारकर गायक को भेंट कर दिए।

बाद में छोटू छलिया ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि उन्हें राबड़ी देवी ने “डायमंड कंगन” उपहार में दिए हैं। इसके बाद विपक्षी दलों ने मामले को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए और जांच की मांग भी की।

निशांत यादव को लेकर भी दिया बयान

कंगन विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए सुनील सिंह ने निशांत यादव की शैक्षणिक योग्यता को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि वर्षों तक कुछ लोग उन्हें इंजीनियर बताते रहे, लेकिन बाद में दाखिल किए गए दस्तावेजों से पता चला कि वे 12वीं पास हैं।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिस तरह मुख्यमंत्री बनने के बाद सम्राट चौधरी ने अपनी पगड़ी उतारकर प्रायश्चित किया था, उसी तरह कुछ नेताओं को भी गलत जानकारी फैलाने के लिए माफी मांगनी चाहिए।

JDU का पलटवार

सुनील सिंह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए JDU प्रवक्ता Neeraj Kumar ने कहा कि यदि कोई यह आरोप लगाता है कि निशांत यादव कॉलेज छोड़कर भाग गए थे, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

राजनीतिक बयानबाजी तेज

कंगन विवाद अब केवल उपहार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह बिहार की राजनीति में नया मुद्दा बन गया है। एक तरफ RJD इसे भावनात्मक और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा बता रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष इसकी पारदर्शिता और वास्तविक कीमत को लेकर सवाल उठा रहा है।

फिलहाल यह विवाद राजनीतिक बयानबाजी के केंद्र में है और आने वाले दिनों में इस पर सियासी बहस और तेज होने की संभावना है।

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